Delhi: दिल्ली पुलिस की हाई-सिक्योरिटी यूनिट में चोरी, हेड कांस्टेबल पर आरोप, सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
दिल्ली पुलिस की सबसे प्रतिष्ठित इकाई मानी जाने वाली स्पेशल सेल के मालखाने में हुई चोरी की घटना ने देशभर में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना केवल एक आम चोरी नहीं, बल्कि सुरक्षा में इतनी बड़ी सेंध है कि इससे दिल्ली पुलिस की साख पर गहरी चोट पहुंची है। यह सवाल अब हर नागरिक के मन में उठ रहा है कि जब राजधानी की सबसे हाई-सिक्योरिटी यूनिट में इस तरह की घटना हो सकती है, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
लोधी कॉलोनी स्थित स्पेशल सेल के मालखाने में चार स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था थी। अंदर दाखिल होना लगभग असंभव माना जाता था, लेकिन फिर भी एक व्यक्ति सुबह करीब साढ़े चार बजे हेलमेट और दस्ताने पहनकर भीतर दाखिल हुआ और वहां रखे 50 लाख रुपये नकद और दो डब्बों में बंद सोना चुरा कर निकल गया। यह पूरा मामला पहले एक रहस्य बना रहा, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और प्राथमिक जांच के बाद जो सच्चाई सामने आई, वह और भी चौंकाने वाली थी।
जांच में पता चला कि यह व्यक्ति कोई बाहरी चोर नहीं, बल्कि खुद स्पेशल सेल का हेड कॉन्स्टेबल खुर्शीद था, जिसे हाल ही में पूर्वी दिल्ली यूनिट में ट्रांसफर किया गया था। उसका यूनिट के मालखाने से जुड़ाव और वहां की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी होना इस बात की पुष्टि करता है कि यह चोरी एक सुनियोजित अंदरूनी साजिश थी।
मामले को और अधिक संवेदनशील बना देने वाली बात यह है कि खुर्शीद ने अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर एक हिंदू महिला कांस्टेबल से शादी भी की है, जिसे लेकर विभाग में भी कई तरह की चर्चाएं तेज हैं। इस पहलू की भी अब जांच हो रही है कि क्या यह शादी उसकी किसी योजना का हिस्सा थी या कोई व्यक्तिगत मामला जिसे बाद में पेशेवर लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।
इस घटना ने यह दिखा दिया है कि अगर कोई व्यक्ति स्पेशल सेल की इस तरह की चाक-चौबंद सुरक्षा को पार कर सकता है, तो वह केवल चोरी ही नहीं, बल्कि और भी गंभीर खतरे को अंजाम दे सकता था — जैसे कि विस्फोटक या खतरनाक हथियार मालखाने में रखना। यह महज़ एक चोरी नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है।
अब आम लोग यह जानना चाहते हैं कि दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा इस गंभीर लापरवाही और अंदरूनी सेंधमारी के मुद्दे पर कब सामने आएंगे। लोगों की मांग है कि पुलिस मुख्यालय (PHQ) में तत्काल एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस आयोजित की जाए, ताकि पूरी जानकारी सार्वजनिक हो सके और जवाबदेही तय की जा सके।
इस पूरी घटना ने दिल्ली पुलिस की आंतरिक निगरानी, अनुशासन और जवाबदेही पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जब देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली यूनिट में ही इस प्रकार की घटना घट सकती है, तो फिर आम जनता कैसे भरोसा करेगी कि पुलिस उसे सुरक्षित रख पाएगी?
इस हाई-प्रोफाइल चोरी मामले की जांच तेज़ी से चल रही है। उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस इस प्रकरण में पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए एक सख्त प्रणाली लागू की जाएगी।


