Delhi Old Vehicle Ban: दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर कार्रवाई से सेकंड हैंड बाजार संकट में, डीलर्स बोले – सरकार दे व्यावहारिक समाधान
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
नई दिल्ली, 4 जुलाई 2025 — दिल्ली में 15 साल पुरानी पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों पर दिल्ली सरकार की सख्ती अब बाजार पर असर दिखाने लगी है। गाड़ियों की जबरन जब्ती और कानूनी कार्रवाई के बाद सेकंड हैंड गाड़ियों के डीलर्स और ग्राहक दोनों परेशान हैं। खासतौर पर रोहिणी और नरेला जैसे सेकंड हैंड मार्केट हब में व्यापार ठप पड़ने की स्थिति बन गई है।
ग्राहक निराश, डीलर स्टॉक में फंसे
डीलर्स का कहना है कि अब गाड़ियों की कीमत कबाड़ दर पर पहुंच गई है। एक डीलर ने बताया, “पहले लाखों में बिकने वाली कारें अब कोई लेने को भी तैयार नहीं। ग्राहक बेच नहीं पा रहे और हम खरीद नहीं पा रहे।”
अन्य राज्यों में भी बंद हुआ विकल्प
जहां पहले पुरानी दिल्ली की गाड़ियाँ हरियाणा, यूपी, बिहार, झारखंड में भेज दी जाती थीं, अब वहां भी टैक्स और रजिस्ट्रेशन की जटिलताएं आड़े आ रही हैं। इससे इन राज्यों में भी पुरानी गाड़ियों की डिमांड न के बराबर रह गई है।
सरकार की दलील और व्यापारियों की मांग
दिल्ली सरकार का कहना है कि यह कदम प्रदूषण नियंत्रण के लिए ज़रूरी है। लेकिन कारोबारी वर्ग मांग कर रहा है कि या तो स्क्रैप पॉलिसी को व्यावहारिक बनाया जाए या फिर पुराने वाहनों के रिन्यूअल (RC Renewal) के लिए विकल्प खोले जाएं।
डीलर्स की अपील
सेकंड हैंड कार बाजार में काम करने वाले कारोबारियों का कहना है कि सरकार अगर पुरानी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में कन्वर्जन जैसी स्कीम लागू करे या ट्रेड-इन स्कीम को बढ़ावा दे तो व्यापार और पर्यावरण – दोनों को राहत मिल सकती है।
फिलहाल बाजार में छाई अनिश्चितता
अभी दिल्ली का सेकंड हैंड कार बाजार रुका हुआ है और डीलर्स सरकार से व्यावहारिक नीतिगत राहत की उम्मीद कर रहे हैं।



