World Suicide Prevention Day: आत्महत्या पर रिपोर्टिंग में संवेदनशीलता जरूरी, डॉ. ओम प्रकाश ने मीडिया से जिम्मेदार पत्रकारिता की अपील की
नई दिल्ली। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 10 सितंबर 2026 के अवसर पर डॉ. ओम प्रकाश ने मीडिया संगठनों से आत्महत्या से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय सटीक, संवेदनशील और जिम्मेदार पत्रकारिता अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है और खबरों को प्रस्तुत करने का तरीका ऐसा होना चाहिए, जिससे समाज में कलंक और चुप्पी कम हो तथा मानसिक संकट से गुजर रहे लोगों को समय पर मदद लेने के लिए प्रोत्साहन मिले।
डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम “Changing the Narrative on Suicide” है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य आत्महत्या को लेकर समाज में मौजूद नकारात्मक धारणाओं, कलंक और चुप्पी की जगह समझ, संवेदनशीलता, उम्मीद और समय पर सहायता लेने की सोच को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि आत्महत्या को किसी एक घटना या व्यक्तिगत परेशानी का सीधा परिणाम बताना उचित नहीं है। यह एक जटिल और रोकथाम योग्य सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें कई परिस्थितियां और कारक जुड़े हो सकते हैं। इसलिए मीडिया को किसी मामले को केवल परीक्षा में असफलता, रिश्ते में परेशानी, आर्थिक कठिनाई या किसी एक घटना से जोड़कर प्रस्तुत करने से बचना चाहिए।
डॉ. ओम प्रकाश ने आत्महत्या से संबंधित खबरों में इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग में सम्मानजनक और संवेदनशील शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ऐसी भाषा से बचना जरूरी है, जिससे आत्महत्या को अपराध, उपलब्धि, सफलता या असफलता के रूप में देखने का संदेश जाए।
उन्होंने कहा कि आत्महत्या से जुड़े मामलों में संबंधित व्यक्ति और उसके परिवार की निजता तथा गरिमा की रक्षा मीडिया की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। परिवार की निजी परिस्थितियों, तस्वीरों, वीडियो या व्यक्तिगत सोशल मीडिया सामग्री को केवल खबर को सनसनीखेज बनाने के लिए सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।
डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि किसी घटना की रिपोर्टिंग के दौरान आत्महत्या के तरीके का विस्तृत विवरण देने से बचना चाहिए। इसके साथ ही घटना से जुड़े विशिष्ट स्थान या कथित सुसाइड नोट को दिखाने अथवा विस्तार से प्रकाशित करने से भी परहेज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारियों को अनावश्यक प्रमुखता देना जिम्मेदार रिपोर्टिंग के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने मीडिया संस्थानों से सनसनीखेज शीर्षकों और किसी आत्महत्या की घटना को बार-बार अत्यधिक प्रमुखता देने से बचने की अपील की। डॉ. ओम प्रकाश के अनुसार खबर का उद्देश्य घटना को सनसनी में बदलना नहीं, बल्कि लोगों को सही जानकारी देने के साथ मानसिक स्वास्थ्य और उपलब्ध सहायता के प्रति जागरूक करना होना चाहिए।
डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि आत्महत्या की घटना को किसी एक कारण से जोड़ देना भी उचित नहीं है। परीक्षा, संबंधों में तनाव या आर्थिक समस्या जैसी कोई परिस्थिति सामने आने पर भी उसे अकेले आत्महत्या का कारण घोषित नहीं किया जाना चाहिए। मानसिक और भावनात्मक संकट के पीछे कई जटिल एवं परस्पर जुड़े कारण हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पत्रकारिता में केवल घटना की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। ऐसी खबरों में मानसिक और भावनात्मक संकट के संभावित चेतावनी संकेतों, उपचार और उपलब्ध सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी शामिल की जानी चाहिए। इससे संकट से गुजर रहे व्यक्ति या उसके परिवार को समय रहते पेशेवर सहायता लेने का रास्ता मिल सकता है।
डॉ. ओम प्रकाश ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से उबरने वाले लोगों की सकारात्मक कहानियों को भी मीडिया में जगह देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों का सामना करने, सहायता मांगने और उपचार के जरिए बेहतर होने की कहानियां समाज में उम्मीद पैदा कर सकती हैं। इससे यह संदेश जाता है कि गंभीर मानसिक संकट की स्थिति में भी मदद उपलब्ध है और उससे बाहर निकलना संभव है।
उन्होंने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर रिपोर्ट तैयार करते समय योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय लेने की भी सलाह दी। डॉ. ओम प्रकाश के अनुसार विशेषज्ञों की मदद से आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों को अधिक तथ्यात्मक और जिम्मेदार तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।
डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि मीडिया को किसी भी स्थिति में आत्महत्या का रोमांटिक चित्रण या महिमामंडन नहीं करना चाहिए। इसे किसी समस्या से बाहर निकलने के विकल्प या समाधान के रूप में प्रस्तुत करना भी उचित नहीं है। इसके बजाय खबरों में सहायता, उपचार, उम्मीद और संकट से उबरने की संभावनाओं पर जोर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आत्महत्या से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने के लिए इस विषय पर बातचीत का तरीका बदलना बेहद जरूरी है। परिवार, समाज, स्वास्थ्य सेवाओं और मीडिया को ऐसा वातावरण तैयार करने में भूमिका निभानी चाहिए, जिसमें मानसिक परेशानी से गुजर रहा व्यक्ति बिना डर या शर्म के अपनी समस्या साझा कर सके और आवश्यकता पड़ने पर पेशेवर सहायता मांग सके।
डॉ. ओम प्रकाश ने मानसिक संकट या आत्महत्या के विचारों का सामना कर रहे लोगों के लिए उपलब्ध सहायता की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत में Tele-MANAS की हेल्पलाइन 14416 या 1-800-891-4416 पर संपर्क किया जा सकता है। गंभीर स्थिति में नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में सहायता ली जा सकती है और आपात स्थिति में 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि यदि कोई व्यक्ति तत्काल जोखिम में दिखाई दे रहा है तो उसे अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए और जल्द से जल्द पेशेवर या आपातकालीन सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर डॉ. ओम प्रकाश ने दोहराया कि जिम्मेदार मीडिया रिपोर्टिंग लोगों की जिंदगी पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने मीडिया संस्थानों से संवेदनशील भाषा अपनाने, निजता और गरिमा का सम्मान करने, सनसनी से बचने तथा प्रत्येक प्रासंगिक रिपोर्ट में सहायता और उपचार से जुड़ी उपयोगी जानकारी देने की अपील की।
डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि आत्महत्या से जुड़ी चुप्पी और सामाजिक कलंक को समझ, संवाद, उम्मीद और समय पर सहायता में बदलना ही “Changing the Narrative on Suicide” की मूल भावना है। जिम्मेदार रिपोर्टिंग के जरिए मीडिया इस बदलाव में महत्वपूर्ण भागीदार बन सकता है और लोगों को यह संदेश दे सकता है कि संकट की स्थिति में सहायता उपलब्ध है तथा मदद मांगना जरूरी और उपयोगी कदम है।