Delhi Floods: साउथ ईस्ट दिल्ली में बाढ़ का कहर, लोग और मवेशी संकट में
रिपोर्ट, हेमंत कुमार।
दिल्ली में यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर साउथ ईस्ट दिल्ली के निचले इलाकों पर पड़ा है। मदनपुर खादर, विश्वकर्मा कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का पानी भर गया है, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को तैनात करना पड़ा। अब तक 171 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
सबसे चिंताजनक हालात मदनपुर खादर के खड्डा कॉलोनी इलाके में हैं, जहां बाढ़ ने लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पालतू पशुओं को भी प्रभावित किया है। सैकड़ों की संख्या में भैंसें और गाय भूख और प्यास से तड़प रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने पशुओं के लिए किसी तरह की व्यवस्था नहीं की है। मजबूर होकर ग्रामीण खुद ही टेंट लगाकर और चारा जुटाकर अपने मवेशियों की देखभाल कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दूर-दराज से चारा लाना बेहद मुश्किल हो गया है, क्योंकि पूरे इलाके में पानी भरा हुआ है।
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि प्रशासन ने लोगों के लिए तो राहत शिविर बनाए हैं, लेकिन पशुओं की दुर्दशा पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। “हम खुद अपने मवेशियों को खिलाने-पिलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पानी और चारे की भारी कमी है। हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।”
इसी बीच राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए डिविजनल कमिश्नर नीरज सेमवाल और जिला मजिस्ट्रेट डॉ. सरवन बंगारिया ने आज बाढ़ प्रभावित शिविरों का दौरा किया। अधिकारियों का दावा है कि साउथ ईस्ट दिल्ली में 60 से 70 राहत शिविर बनाए गए हैं और जरूरत के हिसाब से इनकी संख्या बढ़ाई या घटाई जा रही है। उन्होंने बताया कि खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है, एमसीडी की ओर से सैनिटाइजेशन वर्कर लगातार काम कर रहे हैं और दिल्ली जल बोर्ड को सीवर की समस्याएं ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। राहत शिविरों में डॉक्टरों की टीम और दिल्ली पुलिस की तैनाती भी की गई है।
अधिकारियों के दावों के बावजूद प्रभावित लोगों का कहना है कि राहत व्यवस्था अधूरी है। खासकर पशुओं के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे ग्रामीण और पशुपालक बेहद परेशान हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने ठहरने का इंतजाम तो किया है, लेकिन खाने-पीने और पशुओं के चारे की समस्या का समाधान नहीं हुआ। वे प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि तुरंत मवेशियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी जानें बच सकें।


