CP Radhakrishnan Oath: सी. पी. राधाकृष्णन बने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति मुर्मु ने दिलाई शपथ
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
नई दिल्ली, 12 सितंबर: भारत को नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। वरिष्ठ नेता और राजग उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को देश के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्य, विभिन्न राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री, संसद के वरिष्ठ नेता तथा अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पड़ाव माना जा रहा है। लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे राधाकृष्णन ने राजनीति और समाजसेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी छवि को स्थापित किया है। उनके अनुभव, विचारशीलता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए माना जा रहा है कि वे संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने कर्तव्यों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।
गौरतलब है कि हाल ही में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में सी. पी. राधाकृष्णन ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के उम्मीदवार और पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के अंतर से पराजित किया था। इस जीत को राजग की एक बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि राधाकृष्णन का अनुभव और दृष्टिकोण लोकतंत्र को और मजबूत करने में सहायक होगा। वहीं विपक्षी नेताओं ने भी आशा जताई कि नए उपराष्ट्रपति निष्पक्ष और लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे।
देश की राजनीति में यह क्षण इसलिए भी अहम है क्योंकि उपराष्ट्रपति न केवल राज्यसभा के सभापति होते हैं बल्कि वे राष्ट्रपति के बाद देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होते हैं। ऐसे में राधाकृष्णन की भूमिका आने वाले समय में राष्ट्रीय विमर्श और संसदीय कार्यों को दिशा देने में अहम रहेगी।
सी. पी. राधाकृष्णन की नियुक्ति के साथ ही राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले वर्षों में संसद की कार्यवाही को और अधिक अनुशासित, प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में नए कदम उठाए जा सकते हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि वे अपने पद का उपयोग देश की एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में करेंगे।


