Thursday, January 22, 2026

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Haryana Election Result : बीजेपी के लिए क्यों ख़ास है ये जीत ?

नई दिल्ली : हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणामों (Haryana Election Result) ने बीजेपी (BJP) को लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2024) में उम्मीदों के मुताबिक सफलता न मिलने के गम को कम किया है, वही राज्य की सत्ता से एक दशक से दूर कांग्रेस (Congress) को बड़ा झटका लगा है। हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम इसीलिए भी खास हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव के बाद से ऐसा लगने लगा था कि पीएम मोदी (PM Narendra Modi) की छवि अब बीजेपी के लिए चुनावों में जीत की गारंटी नहीं रह गया है, लेकिन चुनाव परिणामों ने एक बार फिर से ये साबित कर दिया है कि देश की राजनीति (Indian Politics)  में अभी भी बीजेपी की पैठ मजबूत है, जिसे भेदने के लिए कांग्रेस सहित अन्य तमाम विपक्षी दलों को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी।

एक तरह से हरियाणा की बाज़ी बीजेपी के हाथों से छिटकी हुई थी, लेकिन कुशल रणनीति (efficient strategy) के दम पर बीजेपी ने इस बाज़ी को अपने हाथों से छिटकने नहीं दिया और जिस कांग्रेस की जीत पक्की मानी जा रही थी, उसे अपने अकुशल व अनुभवहीन पार्टी नेतृत्व की वजह से सत्ता का वनवास अगले 5 साल और झेलना पड़ेगा। हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम देश की राजनीती के लिए क्यों बहुत खास है ? इसकी विस्तार से चर्चा करेंगे।

Haryana Election Result : पहली बार किसी पार्टी ने लगाई जीत की हैट्रिक

हरियाणा में तीसरी बार बीजेपी की सत्ता में वापसी (3rd Term of BJP Government in Haryana) हुई है, ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी पार्टी ने लगातार तीन विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज़ की हो। बीजेपी को राज्य की 90 सीटों में से 48 सीटें पर जीत मिली है, जो एक रिकॉर्ड है। इससे पहले किसी भी पार्टी को चुनाव में इस तरह का बहुमत हासिल नहीं हुआ था। खुद बीजेपी को बीते दो चुनावों में इतनी सीटें हासिल नहीं हुई थी। सत्ता विरोधी लहर (anti-incumbency wave)  की जो बात कही जा रही थी, चुनाव के परिणामों ने उसे झूठा साबित कर दिया है। चुनाव परिणाम ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि लंबे समय से सत्ता से दूर कांग्रेस ने अभी भी जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए कुछ भी नहीं किया, सिवाय सोशल मीडिया पर एजेंडा चलाने के, जिसे हरियाणा की जनता ने नकार दिया है।

Haryana Election Result : किसानों और पहलवानों के मुद्दे रहे बेअसर

किसानों का आंदोलन (farmers protest) हो या फिर पहलवानों (Wrestlers protest) का, हरियाणा का इन आंदोलनों से सीधा संबंध था और कहा ये जा रहा थी कि राज्य का किसान बीजेपी से खुश नहीं है और पहलवानों के मुद्दे को लेकर भी आम लोगों में बीजेपी को लेकर नाराज़गी है। विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) को कांग्रेस में शामिल कर कांग्रेस नेताओं ने एक तरह से लोगों को ये सन्देश देने का प्रयास किया कि कांग्रेस पार्टी पहलवानों के साथ है, लेकिन बीजेपी ने पहलवानों के मुद्दे पर चुप रहकर इसे चुनावी मुद्दा बनने ही नहीं दिया और लोगों में ये धारणा बन गई कि पहलवानों का आंदोलन कांग्रेस की राजनीति से प्रेरित था। जुलाना सीट (Julana Assembly constituency) से भले ही विनेश को जीत हासिल हुई हो, लेकिन जीत का अंतर महज़ 6000 वोटों का है, जिससे साबित होता है कि विनेश को लोगों का एकतरफा साथ नहीं मिला।

जो खुद को कहते थे किसानों का पुरोधा, चुनाव में हुए चित्त

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ वर्ष 2020-21 में किसानों का जो आंदोलन हुआ था, उसका नेतृत्व किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी (Gurnam Singh Charuni) ने किया था, लेकिन आज गुरनाम सिंह चढूनी, हरियाणा की पिहोवा सीट से चुनाव हार गए हैं (Pehowa Election Final Result) और उनकी जमानत भी ज़ब्त हो गई। जो गुरनाम सिंह चढूनी हरियाणा के किसानों की तरफ से दिल्ली की सीमाओं पर आन्दोलन कर रहे थे, उन्हें चुनावों में सिर्फ 1 हजार 170 वोट मिले हैं। जबकि यही किसान नेता आंदोलन में ये कहते थे कि उनके साथ पूरे हरियाणा के किसान खड़े हैं।

दलित मतदाताओं का भी बीजेपी को मिला साथ

लोकसभा चुनाव के बाद से ये कहा जाने लगा कि बीजेपी से दलित वोटरों (dalit voters) ने दूरी बना ली है, लेकिन हरियाणा के परिणामों ने इसी भी झूठा साबित कर दिया है। पीएम मोदी ने अपनी रैलियों में कांग्रेस पर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दलितों और ओबीसी को ठगने का काम किया है। हुड्डा शासनकाल (hudda government of haryana) को याद दिलाते हुए पीएम मोदी ने रैलियों में कहा कि ‘शायद की कोई साल रहा हो, जब दलितों और ओबीसी के उत्पीड़न की घटनाएं हुड्डा के शासनकाल में न हुई हों। अमित शाह (Amit Shah), मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) और मुख्यमंत्री नायब सैनी (Nayab Singh Saini) ने भी अपनी रैलियों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उधर, कांग्रेस का फोकस जाट (Jat Voters) और ओबीसी (OBC Voters) की तरफ ज्यादा रहा। चुनाव परिणा इस बात की तस्दीक करते हैं कि दलित मतदाताओं का साथ बीजेपी को मिला है।

राहुल गाँधी को फिर से खुद को साबित करने की जरुरत, ओवर कॉन्फिडेंस ने बिगाड़ा कांग्रेस का खेल

कांग्रेस के नजरिये से बात करें तो जिस तरीके से राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को लेकर तमाम बातें कही जा रही थीं, दावा किया जा रहा था कि देश की राजनीति में वह बहुत तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं, उनकी एक गंभीर इमेज बनती भी दिख रही थी उसको बहुत बड़ा धक्का लगा है। हरियाणा में कांग्रेस के पास तमाम क्षत्रप थे। भूपेंद्र हुड्डा (Bhupendra Hudda) से लेकर कुमारी शैलजा (Kumari Shailja) और सुरजेवाला (Randeep Surjewala) तक, इसके बावजूद वहां जाट वोटर्स तो खिसके ही, नॉन जाट वोटर्स भी दूर हो गए। राहुल गांधी ने भूपेंद्र हुड्डा को पूरा समय दिया और उनको फ्री हैंड दिया, जबकि कुमारी शैलजा को थोड़ा पीछे रखा। वो खुद इतने ओवर कॉन्फिडेंस थे कि अमेरिका चले गए। इसी बीच कुमारी शैलजा 14 दिनों तक नाराज रहीं। कांग्रेस को तो कुमारी शैलजा को 14 घंटे में मना लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अब नतीजे सामने हैं।

हरियाणा के चुनाव परिणामों ने लोकसभा चुनाव के परिणामों से हतोत्साहित बीजेपी नेताओं व कार्यकर्ताओं में एक तरह से दुबारा जोश भरने का काम किया है। इस परिणाम से अब बीजेपी देश भर में यह सन्देश देगी कि उसे हर वर्गों का साथ अभी भी मिल रहा है और आगामी दिनों में अन्य राज्यों में होनेवाले विधानसभा चुनाव में पार्टी पुरे जोश खरोश से चुनावी मैदान में उतरेगी, जिससे कांग्रेस को अन्य राज्यों में भी कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है।

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