Home State Delhi NCR DFCCIL: DFCCIL और JNPT ने WDFC–पोर्ट प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी पर रणनीतिक बैठक की, अंतिम खंड की समीक्षा की

DFCCIL: DFCCIL और JNPT ने WDFC–पोर्ट प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी पर रणनीतिक बैठक की, अंतिम खंड की समीक्षा की

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DFCCIL: DFCCIL और JNPT ने WDFC–पोर्ट प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी पर रणनीतिक बैठक की, अंतिम खंड की समीक्षा की

DFCCIL: DFCCIL और JNPT ने WDFC–पोर्ट प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी पर रणनीतिक बैठक की, अंतिम खंड की समीक्षा की

रिपोर्ट, हेमंत कुमार।

नोएडा: डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (JNPT) के बीच एक समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें जवाहरलाल नेहरू पोर्ट और पश्चिमी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के बीच प्रत्यक्ष रेल कनेक्टिविटी की स्थापना पर प्रगति की समीक्षा और रणनीतिक विचार-विमर्श किया गया। चर्चा का मुख्य फोकस 102 किलोमीटर लंबे जेएनपीटी–वैतरना खंड पर रहा, जो WDFC का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क खंड है। बैठक में निर्माण कार्य, सिग्नलिंग प्रणाली और संबद्ध अवसंरचना की स्थिति, तकनीकी पहलुओं और समयबद्ध पूर्णता पर विशेष ध्यान दिया गया।

बैठक की अध्यक्षता DFCCIL के प्रबंध निदेशक श्री प्रवीण कुमार और JNPT के अध्यक्ष श्री गौरव दयाल ने की। बैठक में दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिसमें DFCCIL की ओर से निदेशक (इन्फ्रास्ट्रक्चर) श्री अनुराग शर्मा और कार्यकारी निदेशक (इन्फ्रास्ट्रक्चर) श्री मनीष कुमार अवस्थी शामिल थे। बैठक में भारत के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट के साथ WDFC की निर्बाध कनेक्टिविटी के रणनीतिक महत्व और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव का व्यापक विश्लेषण किया गया।

DFCCIL के प्रबंध निदेशक ने कहा कि जेएनपीटी और WDFC के बीच प्रत्यक्ष रेल कनेक्टिविटी भारत की रेल-आधारित माल ढुलाई प्रणाली को और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना सड़कों से रेल की ओर माल परिवहन के मॉडल शिफ्ट को बढ़ावा देगी, जिससे परिचालन दक्षता बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, ईंधन की बचत होगी और पर्यावरणीय लाभ भी होंगे। साथ ही, उद्योग को सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती परिवहन समाधान उपलब्ध होंगे।

बैठक के दौरान DFCCIL के वरिष्ठ अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति, क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों और उनके निवारण उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कार्यकारी निदेशक (परियोजना) श्री संदीप श्री वास्तव, समूह महाप्रबंधक श्री विकास श्रीवास्तव और मुख्य महाप्रबंधक (मुंबई) श्री विकास कुमार ने तकनीकी विवरण साझा किए। निर्माण और सिग्नलिंग विभागों के अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि निर्धारित समयसीमा में परियोजना को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

JNPT के अध्यक्ष ने कहा कि WDFC से प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी पोर्ट की रेल-आधारित कार्गो निकासी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी और निर्यात–आयात (EXIM) यातायात अधिक सुगम, तेज और विश्वसनीय बनेगा। 102 किलोमीटर लंबे जेएनपीटी–वैतरना खंड के कमीशनिंग से पोर्ट और इसके आंतरिक क्षेत्रों के बीच रेल हिस्सेदारी, परिचालन दक्षता और कार्गो आवागमन की पूर्वानुमेयता में सुधार होगा। यह परियोजना ट्रांजिट समय में कमी, सड़क मार्गों पर भीड़ घटाने और पोर्ट के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन को सुदृढ़ करने में सहायक होगी।

बैठक के बाद DFCCIL के प्रबंध निदेशक श्री प्रवीण कुमार ने वैतरना–जेएनपीटी खंड का रेलकार से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान भौतिक प्रगति, सुरक्षा प्रबंध, गुणवत्ता मानक और प्रमुख परिचालन प्रणालियों की तत्परता की समीक्षा की गई। निरीक्षण में DFCCIL के वरिष्ठ अधिकारी, परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता और निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के साथ-साथ सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

वर्तमान में उन्नत निष्पादन चरण में पहुंच चुका जेएनपीटी–वैतरना खंड, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट और उत्तरी भू-भाग के बीच माल ढुलाई को तेज और अधिक विश्वसनीय बनाएगा। इसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और अन्य प्रमुख उपभोग एवं उत्पादन केंद्र शामिल हैं। परियोजना से रेल कार्गो हैंडलिंग क्षमता में वृद्धि, EXIM और घरेलू माल के लिए ट्रांजिट समय में कमी और भारत के राष्ट्रीय फ्रेट रेल नेटवर्क की मजबूती सुनिश्चित होगी।

यह प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी पूर्णतः विद्युतीकृत डेडीकेटेड रेल कॉरिडोर पर उच्च क्षमता वाली, एंड-टू-एंड माल ढुलाई को सक्षम बनाएगी। इससे निश्चित ट्रांजिट समय-सारिणी और बेहतर आपूर्ति श्रृंखला विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी। साथ ही, पोर्ट की ओर जाने वाले प्रमुख सड़क मार्गों पर भीड़ कम होगी, जिससे उत्सर्जन में कमी और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कार्बन फुटप्रिंट में गिरावट आएगी। दीर्घकाल में, यह कनेक्टिविटी औद्योगिक विकास, हिंटरलैंड एकीकरण और बहु-माध्यमीय लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को सशक्त समर्थन प्रदान करेगी।

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