Stanley Malware: आज का साइबर सुरक्षा विचार, स्टैनली ब्राउज़र मैलवेयर से सावधान रहें
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
स्टैनली एक नया और अत्यधिक भ्रामक ब्राउज़र मैलवेयर टूलकिट है, जो उपयोगकर्ताओं को नकली वेबसाइट दिखाता है, जबकि ब्राउज़र के एड्रेस बार में असली URL दिखाई देता रहता है। यह तकनीक आम यूजर्स के साथ-साथ अनुभवी लोगों को भी भ्रमित कर सकती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्टैनली से बचाव के लिए केवल सतर्क रहना ही नहीं, बल्कि सक्रिय ब्राउज़र स्वच्छता, मजबूत एंडपॉइंट सुरक्षा और प्रभावी घटना-प्रतिक्रिया उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। उपयोगकर्ताओं को तुरंत अपने ब्राउज़र एक्सटेंशन की जांच करनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध एक्सटेंशन को बिना देरी हटाना चाहिए।
स्टैनली मैलवेयर-एज़-ए-सर्विस मॉडल पर काम करता है और इसे रूसी साइबर फोरम पर लगभग 2,000 से 6,000 डॉलर में बेचा जा रहा है। यह iframe overlays और एलिमेंट इंजेक्शन जैसी उन्नत स्पूफिंग तकनीकों का इस्तेमाल करता है, जिससे यूजर को लगता है कि वह असली वेबसाइट पर है, जबकि वास्तव में वह फर्जी पेज पर अपनी जानकारी दर्ज कर रहा होता है। यह मैलवेयर अक्सर Chrome एक्सटेंशन के रूप में फैलता है और चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ एक्सटेंशन पर गूगल का “Featured” बैज भी देखा गया है। स्टैनली लॉगिन क्रेडेंशियल चोरी करने, पुश नोटिफिकेशन भेजने, बैकअप डोमेन बदलने और लगातार कमांड-एंड-कंट्रोल सर्वर से संपर्क बनाए रखने में सक्षम है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव के लिए सबसे पहले ब्राउज़र और एक्सटेंशन की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। केवल भरोसेमंद डेवलपर्स के एक्सटेंशन इंस्टॉल किए जाएं और समय-समय पर उनकी समीक्षा कर अनावश्यक या संदिग्ध एक्सटेंशन हटाए जाएं। एंटरप्राइज वातावरण में ऑटोमैटिक एक्सटेंशन इंस्टॉलेशन को नियंत्रित करना भी अहम है। इसके साथ ही Chrome, Edge, Firefox और अन्य ब्राउज़र को हमेशा अपडेट रखना चाहिए और ऑपरेटिंग सिस्टम के सुरक्षा पैच समय पर लागू करने चाहिए।
मजबूत एंडपॉइंट सुरक्षा भी स्टैनली जैसे खतरों से बचाव में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे एंटी-मैलवेयर सॉफ्टवेयर का उपयोग करना चाहिए, जिसमें रियल-टाइम ब्राउज़र प्रोटेक्शन और behavioral detection की सुविधा हो, ताकि किसी भी असामान्य गतिविधि को समय रहते पकड़ा जा सके। नेटवर्क स्तर पर DNS फ़िल्टरिंग और वेब प्रॉक्सी के जरिए संदिग्ध डोमेन को ब्लॉक करना चाहिए और संवेदनशील लॉगिन के लिए Zero Trust पॉलिसी व मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाना चाहिए।
यदि सिस्टम स्टैनली से संक्रमित हो जाए, तो तुरंत संदिग्ध एक्सटेंशन हटाकर ब्राउज़र को डिफॉल्ट सेटिंग्स पर रीसेट करना चाहिए। इसके बाद अपडेटेड एंटी-मैलवेयर टूल से पूरा सिस्टम स्कैन कर खतरों को क्वारंटीन और डिलीट करना जरूरी है। ब्राउज़र की कुकीज, कैश और सेव किए गए पासवर्ड साफ करें और सभी महत्वपूर्ण खातों के पासवर्ड तुरंत बदलें। साथ ही स्टार्टअप प्रोग्राम और शेड्यूल्ड टास्क की जांच कर छिपी हुई एंट्री का पता लगाएं।
विशेषज्ञों के अनुसार केवल URL देखकर भरोसा करना अब सुरक्षित नहीं रहा। उपयोगकर्ताओं को HTTPS सर्टिफिकेट विवरण जांचने और संदिग्ध लॉगिन पेज की पहचान करने की ट्रेनिंग देना समय की मांग है। सतर्कता, तकनीकी सुरक्षा और सही जानकारी ही स्टैनली जैसे उन्नत साइबर खतरों से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।


