DFCCIL GCT Terminals: प्रवीण कुमार ने दरअसल प्रगति समीक्षा की, शीघ्र संचालन पर जोर
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
नोएडा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) के प्रबंध निदेशक प्रवीण कुमार ने मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को वेस्टन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के अंतर्गत चल रहे प्रमुख गति शति मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनलों (GCTs) का रेल माध्यम से स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने टर्मिनलों और कॉरिडोर सेक्शनों की स्थिति, निर्माण प्रगति और विकास कार्यों का समग्र आकलन किया।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर मौजूद बाधाओं की पहचान करना और उन्हें समय पर दूर कर परियोजनाओं को समयसीमा में पूरा करना था। प्रधानमंत्री गति शति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत व्यापार और लॉजिस्टिक्स संरचना को सुदृढ़ बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर GCT नेटवर्क को मजबूत करना DFCCIL की प्राथमिकता है।
निरीक्षण के दौरान प्रवीण कुमार ने GCT ऑपरेटरों से बातचीत की, निर्माण प्रगति, अवसंरचना की तैयारी, संचालन की तैयारी और शीघ्र शुरुआत के लिए आवश्यक सहयोग और संसाधनों की समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न टर्मिनलों की स्थिति का जायजा लेते हुए निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही उद्योगों, नियामकों और व्यापारियों के लिए अनबाधित लॉजिस्टिक्स सेवाएं सुनिश्चित करने हेतु तकनीकी, प्रशासनिक और समन्वय संबंधी मुद्दों का समयबद्ध समाधान करने पर जोर दिया।
निरीक्षण में DFCCIL के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें तनागर (निदेशक, ऑपरेशन एवं व्यवसाय विकास), शर्मा (निदेशक, अवसंरचना), मनीष अवस्थी (कार्यकारी निदेशक, अवसंरचना) शामिल थे। कॉरपोरेट कार्यालय से एस. पी. वर्मा, जीजीएम (व्यवसाय विकास एवं व्यवसाय विश्लेषण), प्रशांत कुमार, जीजीएम (मैकेनिकल), विजय कुमार, जे.जी.एम. (ऑपरेशंस), चंद्रशेखर, डी.जी.एम. (व्यवसाय विकास) एवं राकेश कुमार, सहायक प्रबंधक (ऑपरेशंस) उपस्थित रहे।
फील्ड यूनिट नोएडा और जयपुर इकाइयों के वरिष्ठ अधिकारी भी निरीक्षण में शामिल थे, जिनमें मुख्य महाप्रबंधक, उप मुख्य परियोजना प्रबंधक, सिग्नल एवं टेलीकॉम, इलेक्ट्रिकल और ऑपरेशंस विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
निरीक्षण के दौरान हरियाणा के न्यूधारूहेडा, न्यूरेवाडी और सालारपुर औद्योगिक क्षेत्रों तथा राजस्थान के न्यूमतलकपुर और न्यूसाखुन में स्थित गति शति टर्मिनलों के शीघ्र कमिशनिंग पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही सड़क-रेल संपर्क और मौजूदा रेलवे अवसंरचना के साथ एकीकरण की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि इन टर्मिनलों के जल्द चालू होने से मल्टीमॉडल एकीकरण में उल्लेखनीय सुधार होगा, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, परिवहन में लगने वाला समय कम होगा और ToT तथा हाई-स्पीड स्मॉल कार्गो जैसी सेवाओं के माध्यम से रेलवे की मोडल हिस्सेदारी बढ़ेगी।
निरीक्षण के दौरान GCT ऑपरेटरों ने भी अपने सुझाव और मुद्दे साझा किए। DFCCIL अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि सामने आए तकनीकी, प्रशासनिक और समन्वय संबंधी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा। केंद्रीय एवं राज्य सरकारों तथा संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर सभी वर्तमान गति शति टर्मिनलों को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाएगा।
DFCCIL के वरिष्ठ अधिकारियों ने रेखांकित किया कि समय पर कमिशनिंग से लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ेगी, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को सुदृढ़ करने में DFCCIL की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।
निरीक्षण में शामिल GCT ऑपरेटरों के प्रतिनिधियों में मृगांक तिवारी (वरिष्ठ प्रबंधक, एत्मरेट्स), रतन कावत्रा (अतिरिक्त उपाध्यक्ष, प्रस्टीन लॉजिस्टिक्स), विवेक अग्रवाल एवं विवोर (ग्लोबकोस्ट टर्मिनल्स), सुतमि तमत्तल और यदलवंदर सिंह (SKN फ्रेट टर्मिनल्स) शामिल थे।


