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Charak Movie Review: चरक, समाज की कुरीतियों पर सवाल उठाती एक साहसी फिल्म

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Charak Movie Review: चरक, समाज की कुरीतियों पर सवाल उठाती एक साहसी फिल्म

मूवी रिव्यू

*चरक: समाज की कुरीतियों पर सवाल उठाती एक साहसी फिल्म

रेटिंग: 4 स्टार

बॉक्स ऑफिस के ट्रेंड और मसाला फ़िल्मों से दूरी बनाकर फिल्म बनाना बेहद जोखिम का काम होता है , ऐसे में हमें तारीफ करनी होगी सुदीप्तो सेन की जिन्होंने हमेशा ही ऐसे विषयों पर दिल को झकझोर कर रख देने वाली फिल्मों बनाई है सुदीप्तो की पिछली फिल्म केरल स्टोरी ने टिकट खिड़की पर भी 300 करोड़ से ज्यादा की कमाई करने के साथ साथ क्रिटिक्स और दर्शको की भी भी खूब तारीफे बटोरी अब यह बात अलग है कि उन्हें अक्सर कट्टर पंथियों की खरी खोटी सुनने के साथ जान से मारने तक की धमकियां भी मिलती रही है ।

अब बात करते है उनकी नई फिल्म चरक की एक ऐसे विषय पर बनी फिल्म जिसे सेंसर ने ही क्लियर कराना मेकर्स के लिए टेडी खीर साबित हुआ सेंसर कमेटी के सदस्यों को सुदीप्तो ने इस फिल्म की कहानी को लेकर अपनी रिसर्च से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध कराए तब जाकर फिल्म को कमेटी ने एडल्ट सर्टिफिकेट के साथ क्लियर किया । फिल्म की कहानी चरक उत्सव से जुड़ी है जो लगभग एक हजार साल से भी अधिक समय से पूर्वी भारत बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड के साथ दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मनाया जाता रहा है। आज भी यह उत्सव हर साल करीब 15 मार्च से 15 मई) के आसपास बीच यह उत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित होता है।

चरक उत्सव को मां काली और भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है। कहते है इस दौरान देवी-देवता धरती पर आकर भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते है दूसरी और इस उत्सव का दूसरा पक्ष तांत्रिक साधनाएं और अघोरी प्रथाएं और अंध विश्वास से जुड़ी है । आज भी इस उत्सव के दौरान बलि देने की कुप्रथा है अपनी मनोकामना को पूर्ण करने की चाह में कुछ तो छोटे बच्चों की बलि देने के अंधविश्वास के जाल में है।

स्टोरी प्लॉट:
चारो और से ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों के बीच बसे एक छोटे से गांव में भी हर कोई इस उत्सव की तैयारियों मे लगा है, गांव के ज्यादातर लोग बेहद गरीब है बावजूद इसके शाम की दारू पीने और ताश के पत्ते खेलते और अपनी कमाई का एक हिस्सा इसी में उड़ा देते है यहां भी चरक उत्सव के लिए दूर दराज से कई अघोरियों ने डेरा डाला हुआ है, गांव के छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले दो दोस्त भी इस स्टोरी के अहम किरदार है तो गांव की पुलिस चौकी का इंस्पेक्टर और उसकी राइटर पत्नी भी अब शहर से स्टडी टूर के बाद गांव में पति के पास वापस आ गई है , शादी के बारह साल बाद भी इनकी की औलाद नहीं है , कहीं ना कहीं इंस्पेक्टर पति के मन में भी इस चरक उत्सव के दौरान पिता बनने का ख्वाब पल रहा है ऐसे में गांव के दो बच्चों का किडनैप हो जाता है और फिर ऐसा कुछ होता है जो हर किसी को विचलित कर देता है।
ओवर ऑल
अगर आप यह मानते है कि रूढ़िवादी और अंधविश्वासी सिर्फ अनपढ़ और दूर दराज के लोग ही होते है तो फिल्म का क्लाईमेक्स आपका यह भ्रम तोड़ता है फिल्म की लीड जोड़ी अंजली पाटिल (लेखिका )और साहिदुर रहमान (पुलिस इंस्पेक्टर) के रूप में जमे है अन्य कलाकारो में सुब्रत दत्ता, नवनीश ने अपने अपने किरदार को जीवंत कर दिया है, किसी स्टूडियो में लगाए गए सेट पर नहीं वेस्ट बंगाल के एक गांव में शूट यह फिल्म उन दर्शकों की कसौटी पर 100 फीसदी खरी उतरेगी जो सिनेमा मौज मस्ती नहीं समाज की रियल्टी देखने की आस में जाते है तो चरक आपके लिए है।

कलाकार: अंजलि पाटिल, साहिदुर रहमान, सुब्रत दत्ता,शशि भूषण, नवनीश नील, शंखदीप, , निर्माता: सुदीप्तो सेन, जयंती लाल गाड़ा, निर्देशक:शीलादित्य मौलिक
संगीत: 123 मिनट, सेंसर सर्टिफिकेट: एडल्ट,

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