Cyber Security: आज का साइबर सुरक्षा विचार, 15 करोड़ पासवर्ड लीक के बाद क्यों जरूरी है 2FA की आदत
रिपोर्ट, हेमंत कुमार।
नई दिल्ली, 27 जनवरी: 25–26 जनवरी 2026 को प्रकाशित विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार, दुनिया भर में 15 करोड़ से अधिक यूज़र्स के पासवर्ड डार्कवेब पर लीक होने की गंभीर घटना सामने आई है। इस साइबर उल्लंघन ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गहरी चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार Gmail, Facebook, Instagram, Netflix, Yahoo और Outlook जैसे बड़े और भरोसेमंद माने जाने वाले प्लेटफॉर्म्स भी इस लीक से प्रभावित हुए हैं।
आंकड़ों के अनुसार Gmail के लगभग 4.8 करोड़, Facebook के 1.7 करोड़, Instagram के 65 लाख, Netflix के 34 लाख, Yahoo के 40 लाख और Outlook के करीब 15 लाख अकाउंट्स के लॉगिन क्रेडेंशियल्स उजागर हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में यूज़र्स ने अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल किया था, जिससे एक पासवर्ड लीक होने पर कई अकाउंट्स तक पहुंच संभव हो गई।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि लाखों पासवर्ड बेहद कमजोर थे, जैसे “123456”, “password”, “qwerty” जैसे आसानी से अनुमान लगाए जा सकने वाले शब्द। ऐसे पासवर्ड साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान लक्ष्य बनते हैं और क्रेडेंशियल स्टफिंग जैसे हमलों को बढ़ावा देते हैं, जिसमें लीक हुए पासवर्ड को अलग-अलग वेबसाइट्स पर आजमाया जाता है।
इस परिप्रेक्ष्य में पासवर्ड ऑथेंटिकेटर, यानी टू-फैक्टर या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA/MFA), एक प्रभावी सुरक्षा उपाय के रूप में सामने आता है। पासवर्ड ऑथेंटिकेटर सिस्टम में केवल पासवर्ड पर्याप्त नहीं होता, बल्कि एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के रूप में समय-आधारित कोड या हार्डवेयर की की आवश्यकता होती है। इससे लीक हुए पासवर्ड के बावजूद अकाउंट में अनधिकृत लॉगिन को रोका जा सकता है।
ऑथेंटिकेटर सिस्टम क्रेडेंशियल स्टफिंग जैसे हमलों को प्रभावी ढंग से रोकता है, क्योंकि हर 30 से 60 सेकंड में बदलने वाला डायनेमिक कोड साइबर अपराधियों के लिए बाधा बन जाता है। यह कमजोर या दोहराए गए पासवर्ड की स्थिति में भी अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है और सुनिश्चित करता है कि एक अकाउंट के समझौते से अन्य अकाउंट स्वतः असुरक्षित न हों।
हालांकि, इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। ऑथेंटिकेटर पहले से हो चुके हमलों को वापस नहीं रोक सकता। इसके अलावा SMS आधारित OTP अपेक्षाकृत कमजोर माने जाते हैं, जबकि ऐप आधारित या हार्डवेयर की अधिक सुरक्षित विकल्प हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 2FA मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का विकल्प नहीं है, बल्कि उसका पूरक है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे किसी भी बड़े डेटा उल्लंघन की स्थिति में सबसे पहले सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स के पासवर्ड तुरंत बदलने चाहिए, खासकर Gmail, Facebook, Instagram, Netflix, Yahoo और Outlook जैसे प्लेटफॉर्म्स पर। इसके साथ ही हर संभव जगह 2FA सक्षम करना, Google Authenticator, Microsoft Authenticator, Authy या हार्डवेयर सिक्योरिटी की का उपयोग करना बेहद आवश्यक है।
यूज़र्स को यह भी सलाह दी जाती है कि वे अपने ईमेल या अकाउंट के एक्सपोज़र की जांच haveibeenpwned जैसी विश्वसनीय सेवाओं के माध्यम से करें और किसी भी संदिग्ध लॉगिन, ईमेल या वित्तीय गतिविधि पर लगातार नजर रखें। धोखाधड़ी की स्थिति में भारत में साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करना या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराना चाहिए।
साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी उपायों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जागरूकता और अनुशासन से जुड़ी नागरिक जिम्मेदारी भी है। संदिग्ध ईमेल, लिंक या कॉल से सतर्क रहना, अनजान स्रोतों पर क्लिक न करना और नियमित रूप से ईमेल गतिविधि की समीक्षा करना आज के डिजिटल युग में अत्यंत आवश्यक हो गया है।
यह घटना एक स्पष्ट संदेश देती है कि “एक ही पासवर्ड से कई अकाउंट्स लॉगिन हो सकते हैं – यही सबसे बड़ा खतरा है, जबकि पासवर्ड ऑथेंटिकेटर क्रेडेंशियल स्टफिंग को रोकने में अहम भूमिका निभाता है।” साइबर सुरक्षा अब केवल आईटी विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक और संस्था की साझा संस्कृति बन चुकी है। सतर्क रहें, सशक्त बनें और दूसरों को भी जागरूक करें।


