Cyber Security Alert: सुप्रीम कोर्ट ने कहा डिजिटल धोखाधड़ी अब राष्ट्रीय संकट, ठोस कदम जरूरी
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
आज का साइबर सुरक्षा विचार यही है कि भारत में साइबर अपराध अब सिर्फ मामूली घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय संपत्ति और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने IN THE MATTER OF: VICTIMS OF DIGITAL ARREST SCAMS RELATED TO FORGED DOCUMENTS याचिका की सुनवाई के दौरान बताया कि डिजिटल धोखाधड़ी में अब तक ₹54,000 करोड़ की लूट हो चुकी है और इसे “सीधी डकैती” कहा है।
न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं:
• बिखरी हुई प्रतिक्रिया विफल: अपराधी पैसे तुरंत ट्रांसफर कर लेते हैं, जबकि बैंक और नियामक बहुत धीमे हैं।
• भरोसे का संकट: नागरिक अपने पैसे बैंक में जमा करते हैं, लेकिन कमजोर सिस्टम और कम सज़ा इस भरोसे को तोड़ रहे हैं।
• एआई को अग्रिम रक्षा बनाना होगा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि असामान्य ट्रांज़ैक्शन रोकने और व्यवहार पहचानने में सक्षम होना चाहिए।
• पीड़ित मुआवज़ा: न्याय सिर्फ अपराधियों को सज़ा देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ितों की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
• एजेंसियों का समन्वय: RBI, गृह मंत्रालय और प्रवर्तन एजेंसियों को एक साथ काम करना होगा।
क्यों यह महत्वपूर्ण है:
• राज्यों के बजट से बड़ा नुकसान: साइबर अपराध अब वित्तीय चुनौतियों जितना गंभीर है।
• आर्थिक स्थिरता दांव पर: यदि इसे रोका नहीं गया तो डिजिटल अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा डगमगा जाएगा।
• संस्कृति में बदलाव जरूरी: बैंक केवल मुनाफा कमाने वाली संस्थाएं नहीं, बल्कि जनता के भरोसे के संरक्षक भी हैं।
आगे का रास्ता:
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एकीकृत राष्ट्रीय SOP लागू हों, ताकि सभी बैंक और एजेंसियां एक ही प्रोटोकॉल पर काम करें।
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एआई आधारित रोकथाम अनिवार्य हो: वेलोसिटी चेक, व्यवहार विश्लेषण और ट्रांज़ैक्शन रोकने वाले टूल्स।
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पारदर्शी जवाबदेही: संदिग्ध बैंकों की पहचान सार्वजनिक और सख्त दंड।
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पीड़ित-केंद्रित न्याय: नागरिकों के लिए मुआवज़ा ढांचा तैयार।
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नागरिक सशक्तिकरण: डिजिटल गिरफ्तारी, म्यूल अकाउंट्स और सुरक्षित लेनदेन के लिए जागरूकता।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि साइबर अपराध अब छिपा हुआ खतरा नहीं, बल्कि दिन-दहाड़े राष्ट्रीय संपत्ति की लूट है। अब भारत को बिखरे हुए प्रयासों से आगे बढ़कर ठोस साइबर सुरक्षा व्यवस्था बनानी होगी, जहां एआई, एजेंसियों का समन्वय और नागरिक सशक्तिकरण मिलकर हर रुपये की सुरक्षा करें।


