DFCCIL inspection: डीएफसीसीआईएल और उत्तर रेलवे ने न्यू दादरी–रेवाड़ी–अटेली खंड का संयुक्त निरीक्षण किया
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
रेवाड़ी: डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) और उत्तर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को न्यू दादरी–रेवाड़ी–अटेली रेल खंड का संयुक्त रूप से विस्तृत निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य इस खंड में विकसित किए गए जटिल और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की समग्र समीक्षा करना था, जिसमें वायाडक्ट और सुरंग (टनल) जैसे अहम निर्माण कार्य शामिल हैं। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों, ट्रैक की वहन क्षमता और परिचालन से जुड़ी आवश्यकताओं पर गहन चर्चा की।
निरीक्षण दल ने न्यू रेवाड़ी–कुंभावट रेल नेटवर्क से इस खंड के जुड़ाव की भी समीक्षा की, जो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और भारतीय रेलवे के मुख्य नेटवर्क को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके पूरा होने से मालगाड़ियों के आवागमन में लगने वाला समय कम होगा, परिचालन अधिक सुचारू होगा और माल ढुलाई की गति व क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और औद्योगिक व व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
इस संयुक्त निरीक्षण दल का नेतृत्व उत्तर रेलवे की प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक (PCOM) डॉ. मोनिका अग्निहोत्री और DFCCIL के निदेशक (परिचालन एवं व्यवसाय विकास) श्री शोभित भटनागर ने किया। निरीक्षण टीम में DFCCIL के समूह महाप्रबंधक (परिचालन एवं व्यवसाय विकास) श्री नितिन बंसल, उत्तर रेलवे के मुख्य फ्रेट यातायात प्रबंधक (CFTM) श्री ए.के. शम्सी, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (Sr. DOM) श्री विकास वत्स सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने आपसी समन्वय और तालमेल के महत्व पर विशेष जोर दिया। DFCCIL के निदेशक श्री शोभित भटनागर ने कहा कि भारतीय रेलवे और DFCCIL के बीच मजबूत सहयोग से परियोजनाओं को और अधिक प्रभावी, तेज और सुगम बनाया जा सकता है। वहीं, डॉ. मोनिका अग्निहोत्री ने अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श करते हुए बुनियादी सुविधाओं के उन्नयन और परिचालन सुधार पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
यह संयुक्त निरीक्षण भारतीय रेलवे और DFCCIL के बीच मजबूत साझेदारी और साझा विजन का प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पहल देश की माल ढुलाई व्यवस्था को नई दिशा, गति और दक्षता प्रदान करेगी, जिससे न केवल रेल परिचालन सशक्त होगा बल्कि देश के व्यापार, उद्योग और आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।


