DFCCIL: DFC में ऐतिहासिक उपलब्धि, पहली 25-टन एक्सल लोड मालगाड़ी सफलतापूर्वक दौड़ी
रिपोर्ट हेमंत कुमार।
नई दिल्ली। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) ने भारतीय रेल लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 25-टन एक्सल लोड वाली पहली मालगाड़ी का सफल संचालन कर इतिहास रच दिया है। 25 मार्च 2026 को शुरू हुई यह पहल देश में भारी-भरकम माल ढुलाई की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है और इसे ‘PM गति शक्ति’ मिशन को नई रफ्तार देने वाला माना जा रहा है।
यह हाई-कैपेसिटी मालगाड़ी पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) पर चलाई गई, जिसने गुजरात के न्यू गोथांगांव स्थित गति शक्ति कार्गो टर्मिनल से हरियाणा के पलवल स्थित एचटीपीपी साइडिंग तक करीब 1106 किलोमीटर का सफर तय किया। इस दौरान ट्रेन ने स्टील कॉइल्स की ढुलाई की और अपनी क्षमता, गति और तकनीकी मजबूती का सफल प्रदर्शन किया।
इस ट्रेन की खास बात इसकी 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार है, जो पारंपरिक मालगाड़ियों के मुकाबले काफी अधिक है। जहां सामान्य मालगाड़ियां 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती हैं, वहीं यह नई तकनीक से लैस ट्रेन तेज रफ्तार के साथ अधिक माल ढुलाई करने में सक्षम है। 45 वैगनों वाली इस ट्रेन ने एक बार में बड़ी मात्रा में सामान पहुंचाकर लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नई संभावनाएं पैदा कर दी हैं।
25-टन एक्सल लोड का मतलब है कि ट्रेन के प्रत्येक एक्सल (पहियों के जोड़े) पर अधिक भार डाला जा सकता है। अब तक भारतीय रेलवे मुख्य रूप से 22.1 से 23.1 टन के एक्सल लोड पर काम करता था, लेकिन इस नई उपलब्धि के साथ यह क्षमता बढ़कर 25 टन तक पहुंच गई है। यह बदलाव न केवल इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है, बल्कि देश के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती को भी साबित करता है।
इस तकनीकी उन्नयन का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब कम फेरों में ही अधिक माल की ढुलाई संभव हो सकेगी। आंकड़ों के अनुसार, हर वैगन में करीब 8.4 टन अतिरिक्त माल ले जाया जा सकता है, जिससे कुल क्षमता में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की संभावना है। इससे समय की बचत होगी और ऑपरेशन की दक्षता में भी बड़ा सुधार आएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, जिससे उद्योगों को सीधा फायदा मिलेगा। माल ढुलाई सस्ती होने से उत्पादन लागत कम होगी और इसका असर आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंचेगा। साथ ही, भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
DFCCIL की यह उपलब्धि भविष्य में 30-टन एक्सल लोड वाली ट्रेनों के संचालन का रास्ता भी खोलती है। इससे भारत को एक मजबूत और आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी आएगी। यह कदम देश की आर्थिक वृद्धि और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित हो सकता है।


