American Cotton Duty: अमेरिकी कपास पर ड्यूटी माफ, विपक्ष ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए अमेरिकी कपास (American Cotton) पर 31 दिसंबर तक आयात शुल्क (Import Duty) खत्म कर दिया है। यह निर्णय घरेलू कपड़ा उद्योग को सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का तर्क है कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए यह कदम ज़रूरी था।
लेकिन, जैसे ही American Cotton Duty माफी का ऐलान हुआ, विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विपक्षी दलों ने इस फैसले को भारतीय किसानों के साथ “विश्वासघात” बताया। उनका कहना है कि देश के लाखों कपास उत्पादकों को इससे बड़ा झटका लगेगा।
विपक्ष के आरोप
विपक्षी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दबाव में यह कदम उठाया है। एक वरिष्ठ नेता ने बयान दिया—
“मोदी जी ने किसानों के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात किया है। American Cotton Duty माफ करने का मतलब है कि भारतीय किसान अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछड़ जाएंगे। यह केवल उद्योगपतियों के लिए फायदेमंद है और किसानों को नुकसान पहुंचाएगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगे “पूरी तरह घुटने टेक दिए।” विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब दुनिया के कई देशों ने ट्रंप की नीतियों का विरोध किया, तो भारत ने क्यों समझौता किया।
किसानों की चिंता
भारतीय कपास उत्पादकों का मानना है कि American Cotton Duty माफी से विदेशी कपास सस्ता हो जाएगा, जिससे घरेलू उत्पादन की मांग घट सकती है। किसान संगठनों का कहना है कि पहले से ही खेती पर लागत बढ़ रही है और अगर बाजार में विदेशी कपास की बाढ़ आ गई तो भारतीय किसानों की आय और घट जाएगी।
सरकार का पक्ष
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय केवल अस्थायी है और इसका उद्देश्य घरेलू कपड़ा उद्योग को सहारा देना है। उनका कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल निर्यातक देशों में से एक है और अगर कच्चा माल महंगा होगा तो भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।
सरकार का दावा है कि American Cotton Duty हटाने से कपड़ा उद्योग में रोजगार के अवसर भी बचेंगे। फिलहाल उद्योग जगत ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे राहत भरा कदम बताया है।
आर्थिक असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से अल्पकालिक लाभ तो कपड़ा उद्योग को होगा, लेकिन लंबे समय में किसानों की उपज और आय पर असर पड़ सकता है। यदि घरेलू उत्पादन कम हुआ तो भारत की आत्मनिर्भरता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
American Cotton Duty हटाने का मोदी सरकार का यह फैसला निश्चित तौर पर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ उद्योग जगत इसे राहत मान रहा है, वहीं विपक्ष और किसान संगठन इसे आत्मनिर्भर भारत के खिलाफ बता रहे हैं। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था और राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।



