Delhi: दिल्ली में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, स्वच्छ भारत मिशन की असफलता की निशानी: कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
नई दिल्ली, 4 जुलाई 2025 – दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने शुक्रवार को एक कड़े बयान में कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सार्वजनिक शौचालयों की बदतर स्थिति पर की गई टिप्पणी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की असफलता को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी होने के बावजूद दिल्ली अब तक खुले में शौच मुक्त राज्य घोषित नहीं हो सकी, यह भाजपा और आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकारों की विफलता का प्रतीक है।
देवेन्द्र यादव ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा की “ट्रिपल इंजन” सरकार — जिसमें उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और मेयर शामिल हैं — फोटो खिंचवाने की राजनीति में लगी है, लेकिन जनता को मूलभूत सुविधाएं देने में बुरी तरह असफल साबित हो रही है। यही कारण है कि उच्च न्यायालय को सार्वजनिक शौचालयों के रख-रखाव में घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता पर दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली विकास प्राधिकरण को फटकार लगानी पड़ी।
उन्होंने आगे कहा कि स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को हुई थी, और तब से लेकर अब तक जनता से करोड़ों रुपये टैक्स के रूप में वसूले गए हैं। लेकिन इन टैक्सों का क्या उपयोग हुआ, यह दिल्ली के गंदे और टूटी हालत वाले सार्वजनिक शौचालयों को देखकर समझा जा सकता है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए ये हालात बेहद चिंताजनक हैं, क्योंकि अधिकांश शौचालयों में साफ-सफाई, पानी की सुविधा, रोशनी और सुरक्षा तक नहीं है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि दिल्ली के प्रमुख वाणिज्यिक क्षेत्रों जैसे चांदनी चौक, पहाड़गंज, नेहरू प्लेस, आजाद मार्केट, जनकपुरी, तिलक नगर और राजौरी गार्डन में भी सार्वजनिक शौचालयों की हालत भयावह है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहाड़गंज की संगत राशन बाजार, अनाज मंडी और जनरल मार्केट के शौचालयों की तस्वीरें देख कर कोई भी हैरान हो सकता है। इन क्षेत्रों से सरकार को करोड़ों रुपये टैक्स के रूप में मिलते हैं, फिर भी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही।
देवेन्द्र यादव ने यह भी कहा कि दिल्ली में कूड़ा निपटान प्रणाली भी चरमरा गई है। राजधानी में जलभराव, कचरे के ढेर और गंदे शौचालयों की वजह से नागरिकों का जीवन नरक बन गया है। जब नगर निकाय अपने कर्तव्यों का निर्वहन न कर सकें और हालात इतने बिगड़ जाएं कि न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़े, तो यह स्पष्ट है कि मामला गंभीर से भी अधिक गंभीर है।
उन्होंने केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की असलियत अब लोगों के सामने आ चुकी है। जब राजधानी की यह स्थिति है, तो देश के अन्य छोटे-बड़े शहरों की हालत का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत अब तक 11 राज्यों ने खुद को खुले में शौच मुक्त घोषित किया है। परंतु यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली, जो देश की राजधानी है, आज भी इस सूची में शामिल नहीं हो सकी। सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने और योजनाओं के दावे करने के बावजूद आज भी राजधानी में हजारों लोग मजबूरी में खुले में शौच जाने को विवश हैं।
देवेन्द्र यादव ने मांग की कि नगर निगम, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और शौचालयों की स्थिति सुधारने, कचरा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। वरना जनता के धैर्य की परीक्षा लेना सभी सरकारों को भारी पड़ सकता है।


