IFFD 2026: IFFD 2026 में सिनेमा, संघर्ष और तकनीक का संगम, मनोज बाजपेयी ने साझा किया प्रेरक सफर
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
नई दिल्ली। Bharat Mandapam में आयोजित IFFD 2026 के मंच पर सिनेमा, संघर्ष और आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम देखने को मिला। इस खास आयोजन में फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज कलाकारों और फिल्ममेकर्स ने अपने अनुभव साझा किए और बदलते दौर में सिनेमा की दिशा पर चर्चा की।
CineXchange के एक विशेष सत्र में Manoj Bajpayee ने अपने संघर्षपूर्ण सफर को साझा किया। उन्होंने बताया कि एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाना आसान नहीं था, लेकिन लगातार मेहनत और अपने काम के प्रति ईमानदारी ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, केवल लगन, आत्मविश्वास और धैर्य ही इंसान को आगे बढ़ाते हैं।
इस दौरान एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें Nikkhil Advani, Abhishek Chaubey, RS Prasanna और Siddharth Jain शामिल रहे। इस चर्चा का संचालन Mayank Shekhar ने किया।
फिल्ममेकर्स ने विस्तार से बताया कि लिखित कहानियों को बड़े पर्दे पर जीवंत करना एक चुनौतीपूर्ण लेकिन रोमांचक प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में मौलिकता बनाए रखते हुए दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence के बढ़ते प्रभाव पर केंद्रित रहा। फिल्ममेकर्स ने माना कि एआई अब स्क्रिप्ट राइटिंग से लेकर प्रोडक्शन तक हर स्तर पर बदलाव ला रहा है, जिससे सिनेमा के निर्माण की प्रक्रिया तेज और तकनीकी रूप से मजबूत हो रही है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, सिनेमा की असली आत्मा हमेशा मानवीय भावनाओं और कहानियों में ही बसती है।
IFFD 2026 का यह मंच एक बार फिर यह साबित करने में सफल रहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज का आईना, विचारों का मंच और संघर्ष की कहानी भी है। बदलती तकनीक के इस दौर में भी इंसानी कहानियों की ताकत सबसे ऊपर बनी रहेगी।


