Janakpuri Pothole Death Case: जनकपुरी गड्ढा हादसे में बड़ा खुलासा, सब-कॉन्ट्रेक्टर राजेश प्रजापति गिरफ्तार
रिपोर्ट: मनमीन वालिया
दिल्ली के जनकपुरी में गड्ढे में गिरकर युवक कमल की मौत के मामले में पुलिस जांच के दौरान बड़े और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने इस मामले में सब-कॉन्ट्रेक्टर राजेश प्रजापति को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि हादसे की जानकारी होने के बावजूद समय रहते न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही पीड़ित की मदद की गई, जिससे युवक की जान चली गई।
पुलिस के अनुसार टेक्निकल सर्विलांस के जरिए एक अहम आई विटनेस विपिन सिंह सामने आए हैं। विपिन सिंह रोहिणी से एक शादी समारोह में शामिल होकर सागरपुर स्थित अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि एक मोटरसाइकिल सड़क पर बने गहरे गड्ढे में गिर गई है। उन्होंने आगे जाकर यह जानकारी एक गार्ड को दी, जिसने मौके पर मौजूद सब-कॉन्ट्रेक्टर राजेश प्रजापति की लेबर को सूचना दी।
गार्ड द्वारा बताई गई जानकारी के बाद राजेश प्रजापति का मजदूर योगेश मौके पर पहुंचा। योगेश ने गड्ढे में झांककर देखा तो मोटरसाइकिल की हेडलाइट जलती हुई दिखाई दे रही थी और अंदर एक व्यक्ति के होने की भी पुष्टि हुई। इसके बावजूद न तो तत्काल पुलिस को सूचना दी गई और न ही किसी प्रकार की आपात सहायता बुलाई गई।
मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की जांच में सामने आया है कि रात 12:22 बजे मजदूर योगेश ने सब-कॉन्ट्रेक्टर राजेश प्रजापति को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी थी। राजेश प्रजापति त्रिनगर इलाके में रहते हैं और कॉल मिलने के बाद वह करीब 15 से 20 मिनट के भीतर अपनी गाड़ी से जनकपुरी स्थित घटनास्थल पर पहुंच गए थे। पुलिस का कहना है कि राजेश को यह पूरी जानकारी थी कि गड्ढे में एक मोटरसाइकिल और एक व्यक्ति गिरा हुआ है, इसके बावजूद उन्होंने किसी भी विभाग या पुलिस को सूचना देना जरूरी नहीं समझा।

इस मामले की आधिकारिक जानकारी अगली सुबह करीब 8 बजे पीसीआर कॉल के जरिए सामने आई, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। तब तक कमल की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए राजेश प्रजापति को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने बताया कि मजदूर योगेश घटना के बाद से फरार है। उसकी तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। साथ ही घटनास्थल और आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की कड़ी से कड़ी जोड़ी जा सके।
पीड़ित परिवार ने पुलिस को बताया कि वे सबसे पहले रात करीब 1:30 बजे विकासपुरी थाने पहुंचे थे। उस समय उन्होंने मेडिकल एमएलसी और एक्सीडेंट से जुड़ी जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई क्योंकि कमल ने परिवार को बताया था कि वह डिस्ट्रिक्ट सेंटर पहुंच रहा है। इसी कारण परिवार को यह अंदेशा नहीं था कि वह किसी गंभीर हादसे का शिकार हो चुका है।
यह मामला न सिर्फ लापरवाही से मौत का है, बल्कि यह भी दिखाता है कि यदि समय पर सूचना दी जाती तो शायद एक युवक की जान बचाई जा सकती थी। जनकपुरी का यह हादसा दिल्ली में चल रहे निर्माण कार्यों, सुरक्षा इंतजामों और ठेकेदारों की जवाबदेही पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


