Karkardooma Firing: कड़कड़डूमा कम्युनिटी सेंटर फायरिंग केस का खुलासा, मुख्य आरोपी अजमेर से गिरफ्तार; महिला आरोपी की भी भूमिका आई सामने
रिपोर्ट: आशीष कुमार
नई दिल्ली। कड़कड़डूमा कम्युनिटी सेंटर के पास हुई फायरिंग और हत्या के प्रयास के मामले का शाहदरा जिला पुलिस ने खुलासा करते हुए 22 वर्षीय आरोपी अद्दू को राजस्थान के अजमेर से गिरफ्तार किया है। मामले को सुलझाने के लिए आनंद विहार थाना पुलिस, स्पेशल स्टाफ और ANTF शाहदरा की टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। पुलिस ने जांच के दौरान दो पिस्तौल, वारदात में इस्तेमाल बताई जा रही TVS NTORQ स्कूटी, आरोपी द्वारा घटना के समय पहनी गई बताई जा रही टी-शर्ट, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल व फोरेंसिक साक्ष्य बरामद किए हैं। जांच में कृष्णा नगर निवासी 28 वर्षीय आफरीन उर्फ चंदा की कथित भूमिका भी सामने आई है, जिस पर पीड़ितों की मौजूदगी की जानकारी आरोपियों तक पहुंचाने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, 11 सितंबर 2026 को कड़कड़डूमा कम्युनिटी सेंटर के पास फायरिंग की घटना हुई थी। कुछ लोग एक कैफे से बाहर निकलने के बाद पास स्थित आइसक्रीम शॉप के आसपास खड़े थे, तभी स्कूटी पर सवार दो हमलावर वहां पहुंचे और कथित तौर पर दो पिस्तौलों से कई राउंड फायरिंग कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों हमलावर उसी स्कूटी से मौके से फरार हो गए। गोलीबारी में दो लोग घायल हुए, जिनकी पहचान इवेंट ऑर्गेनाइजर अफसर और स्क्रैप कारोबारी इरशाद के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, एक घायल को तीन गोलियां लगी थीं, जबकि दूसरे को एक गोली लगी थी।
घटना के बाद आनंद विहार थाने में FIR संख्या 323/2026 दर्ज की गई। पुलिस ने BNS की धारा 109(1)/3(5) के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। वारदात की गंभीरता को देखते हुए शाहदरा जिला पुलिस ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कई अलग-अलग टीमें गठित कीं। स्पेशल स्टाफ की टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर आशीष, आनंद विहार थाना पुलिस की टीम का नेतृत्व SHO इंस्पेक्टर मनीष कुमार और ANTF की टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर अर्जुन ने किया। इसके अलावा तकनीकी जांच के लिए TST और NATGRID से जुड़ी टीमों की मदद भी ली गई।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और आरोपियों के संभावित भागने के रास्तों पर लगे 350 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही घटना से जुड़े गवाहों और मामले की जानकारी रखने वाले लोगों से पूछताछ की गई। पुलिस टीमों ने आरोपियों के भागने के पूरे संभावित रूट का विश्लेषण करने के साथ तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर मिली सूचनाओं की मदद ली। संदिग्ध आरोपियों की पहचान, उनकी गतिविधियों और संभावित ठिकानों की लगातार जांच की गई। इसी जांच के दौरान पुलिस 22 वर्षीय अद्दू तक पहुंची, जो दिल्ली के वजीराबाद का रहने वाला बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद अद्दू दिल्ली छोड़कर फरार हो गया था और राजस्थान के अजमेर में छिपा हुआ था। तकनीकी निगरानी और स्थानीय इनपुट के आधार पर उसकी लोकेशन का पता लगाया गया। इसके बाद पुलिस टीम अजमेर पहुंची और लगातार प्रयास के बाद आरोपी को पकड़ लिया। जांच के दौरान पुलिस ने दो पिस्तौल बरामद की हैं, जिनका कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा TVS NTORQ स्कूटी, मोबाइल फोन और वह टी-शर्ट भी बरामद की गई है, जिसे आरोपी ने घटना के समय पहना हुआ बताया जा रहा है। बरामद सामग्री को डिजिटल और फोरेंसिक जांच में शामिल किया गया है।
मामले की जांच आगे बढ़ने पर कृष्णा नगर निवासी 28 वर्षीय आफरीन उर्फ चंदा की भूमिका भी सामने आई। पुलिस का आरोप है कि आफरीन ने पीड़ित पक्ष की मौजूदगी की जानकारी अदनान नाम के आरोपी को दी थी। पुलिस के मुताबिक, अदनान ने इस सूचना के आधार पर मुजम्मिल उर्फ साहिल के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। जांच के दौरान आफरीन का मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। पुलिस का दावा है कि मोबाइल फोन में मामले की जांच के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस जांच में फायरिंग के पीछे पुरानी रंजिश की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, घटना से करीब एक महीने पहले घायल इरशाद के दोस्त समीर और आरोपी पक्ष के बीच झगड़ा हुआ था। इस विवाद के दौरान दोनों पक्षों के बीच कथित तौर पर धमकियों का आदान-प्रदान हुआ था। पुलिस इसी पुराने विवाद को फायरिंग की वारदात से जोड़कर जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा थी या तत्काल मिली जानकारी के बाद इसे अंजाम देने की तैयारी की गई।
पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन आरोपियों को Snapchat पर एक वीडियो के जरिए जानकारी मिली कि समीर और इरशाद Hyper Club में मौजूद हैं। इसके बाद कथित तौर पर अपने सूत्रों के जरिए उनकी मौजूदगी की पुष्टि की गई और उन्हें नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई गई। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद आरोपी अपने साथी के साथ स्कूटी से कड़कड़डूमा कम्युनिटी सेंटर पहुंचे और मौका देखकर फायरिंग कर दी। हमलावरों ने कई राउंड गोलियां चलाईं, जिसमें अफसर और इरशाद घायल हो गए। वारदात के तुरंत बाद आरोपी स्कूटी से मौके से फरार हो गए।
शाहदरा जिला पुलिस अब मामले में फरार अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। मुजम्मिल उर्फ साहिल की भूमिका और उसके ठिकाने का पता लगाने के साथ पुलिस हथियारों की कथित सप्लाई से जुड़े पहलू की भी जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि वारदात की योजना बनाने, पीड़ितों की लोकेशन की जानकारी देने, हथियार उपलब्ध कराने या आरोपियों को फरार होने में मदद करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। पुलिस बरामद दोनों पिस्तौलों के स्रोत का पता लगाने का भी प्रयास कर रही है।
जांच में मोबाइल फोन, CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के जरिए आरोपियों के बीच कथित संपर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है, क्योंकि वारदात से पहले Snapchat वीडियो के जरिए पीड़ित पक्ष की लोकेशन की जानकारी मिलने की बात सामने आई है। बरामद स्कूटी के स्वामित्व और घटना से पहले तथा बाद में उसके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जा रही है। फोरेंसिक जांच के जरिए बरामद हथियारों और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के बीच संबंध स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि 350 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज, तकनीकी निगरानी, गवाहों से पूछताछ और स्थानीय सूचनाओं की मदद से मामले की कड़ियां जोड़ी गईं और दिल्ली से फरार होकर अजमेर में छिपे आरोपी तक पहुंचा गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वारदात में शामिल आरोपियों का किसी अन्य आपराधिक घटना या नेटवर्क से संबंध है या नहीं। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और डिजिटल-फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद फायरिंग की पूरी साजिश और इसमें शामिल लोगों की भूमिका और स्पष्ट होने की उम्मीद है।



