नई दिल्ली : राजस्थान (Rajasthan) की रहने वाली 18 साल की एक लड़की, जिसने शादी के बाद न जाने कितने ही हसीन सपने देखे थे, लेकिन क़िस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। शादी को अभी 7 महीने ही बीते थे कि पति की बीमारी से मौत हो गई। पति की मौत के बाद उस 18 वर्षीय नवविवाहिता (Newly Married Women) ने भी पति की चिता पर खुद को जलाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। ये घटना है साल 1987 की, जिसे भारत की अंतिम सती होने की घटना (Roop Kanwar Sati Case) कहा जाता है। इस घटना ने तब राजस्थान की राजनीति (Rajasthan Politics) में भूचाल ला दिया था और तब के तत्कालीन CM को इस्तीफ़ा तक देना पड़ गया था। आइये विस्तार से घटना को जानते हैं।
दरअसल, घटना साल 1987 के चार सितंबर की है। सीकर जिले के दिवराला गांव (Divrala Village Sikar) में राजपूत समाज के माल सिंह (24) के पेट में तीन सितंबर की शाम को अचानक दर्द उठा। उन्हें इलाज के लिए सीकर लाया गया और चार सितंबर की सुबह उनकी मौत हो गई। जयपुर के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी बाल सिंह राठौड़ के छह बच्चों में सबसे छोटी 18 साल रूप कंवर की माल सिंह से महज आठ महीने पहले ही जनवरी में शादी हुई थी। माल सिंह की मौत के बाद उसकी चिता पर रूप कंवर भी जलकर सती हो गई।
तब राजपूत समाज और ग्रामीणों ने कहा कि रूप कंवर अपनी मर्जी से सती हुई है, लेकिन पुलिस तफ्तीश में यह बात सही नहीं निकली कि रूप कंवर अपनी मर्जी से सती हुई है। बताया जाता है उस वक्त रूप कंवर पर सती होने के लिए दबाव बनाया गया था। स्थानीय और राजपूत समाज के लोगों ने रूप कंवर को सती माता का रूप दे दिया और उसकी याद में छोटे से मंदिर का निर्माण भी कर दिया। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस (Rajasthan Police) ने यहां माल सिंह के परिजनों के साथ गांव के 45 लोगों को भी रूपकंवर के सती होने की वजह मानते हुए गिरफ्तार कर लिया था। बड़ी संख्या में गिरफ्तारी के बाद यहां लोगों को आक्रोश दिखा और गांव में भारी विरोध हुआ।
बताया जाता है कि सती कांड के बाद देश में हंगामा मच गया। उस वक्त राजस्थान के मुख्यमंत्री हरदेव जोशी (Former CM Hari Dev Joshi) थे। उनकी गिनती देश के कद्दावर नेताओं में होती थी क्योंकि वह तीन बार सीएम और लगातार 10 बार विधानसभा चुनाव जीतने वाले प्रदेश के इकलौते नेता थे। जब सती कांड के बाद विपक्ष का हमला तेज हो गया तो सीएम हरदेव जोशी पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ने लगा। बात आलाकमान तक पहुंची तो केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया। आखिरकार उन्होंने राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद शिवचरण माथुर (Former CM Shiv Charan Mathur) को सीएम बनाया गया।
आज बुधवार को जयपुर महानगर द्वितीय की सती निवारण स्पेशल कोर्ट (Special Court of Jaipur Mahanagar II ) में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने श्रवण सिंह, महेंद्र सिंह, निहाल सिंह, जितेंद्र सिंह, उदय सिंह, नारायण सिंह, भंवर सिंह और दशरथ सिंह को बरी कर दिया है। बताते चले कि मामले में कुल 45 आरोपी थे। इनमें से 25 आरोपियों को कोर्ट ने 2004 में बरी कर दिया था। 4 फरार हैं। वहीं मामले के शेष आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।


