Sadar Bazar Encroachment: पटरी माफिया के बढ़ते कब्जे पर व्यापारियों की चिंता, पुनर्विकास की मांग तेज
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
नई दिल्ली के सदर बाजार में बढ़ते अतिक्रमण और कथित पटरी माफिया के कब्जे को लेकर व्यापारियों ने गंभीर चिंता जताई है। राकेश कुमार यादव, प्रेजिडेंट फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड एसोसिएशन एवं राष्ट्रीय महामंत्री भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने कहा कि समस्या केवल आरोप-प्रत्यारोप से हल नहीं होगी, बल्कि दिल्ली पुलिस, एमसीडी और प्रशासन को मिलकर ठोस कार्रवाई करनी होगी।
उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने से अधिक जरूरी है कि जमीनी स्तर पर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाए। पुरानी दिल्ली की सभी व्यापारी संस्थाओं को विश्वास में लेकर स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।
यादव का आरोप है कि गरीब पटरी वालों को भी कथित पटरी माफिया नियंत्रित कर रहा है और उनसे भारी रकम वसूली जाती है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।
उन्होंने वर्ष 2006 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि सदर बाजार को नॉन-वॉकिंग और नॉन-स्पर्टिंग जोन घोषित किया गया था। उस समय 62 पटरी धारकों को वैकल्पिक स्थान आवंटित किए गए थे, लेकिन बाद में उन स्थानों पर भी कथित रूप से कब्जा हो गया।
व्यापारी नेता ने मांग की कि सरकार ऐसी सख्त नीति बनाए, जिससे पटरी आवंटन किसी भी परिस्थिति में ट्रांसफर न हो और संबंधित व्यक्ति की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य की जाए।
त्योहारों के दौरान खाली पार्कों में अस्थायी और वैध पटरी व्यवस्था का सुझाव भी दिया गया, ताकि गरीबों की रोजी-रोटी भी चले और मुख्य बाजार अतिक्रमण मुक्त रहे। उन्होंने कहा कि लोहे के बड़े खोंचे स्थायी अतिक्रमण को बढ़ावा देते हैं, जो दुकानों से भी बड़े आकार के होते हैं।
एमसीडी और दिल्ली पुलिस द्वारा स्टाफ की कमी का हवाला दिए जाने पर उन्होंने कहा कि व्यापारी टैक्स देते हैं, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। निजी सुरक्षा गार्ड रखना व्यापारियों का काम नहीं है।
सभी बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने और बीट अधिकारियों को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी देने की मांग भी की गई। 4 मार्च को “पटरी मुक्त बाजार” के संदेश के साथ शांति मार्च निकाला गया, जिसमें व्यापारियों से स्वयं अतिक्रमण हटाने की अपील की गई।
यादव ने कहा कि सदर बाजार और पुरानी दिल्ली का पारंपरिक व्यापार धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। युवा वर्ग पारिवारिक व्यापार के बजाय नौकरी की ओर रुख कर रहा है, जिससे बाजार का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने दिल्ली सरकार से सदर बाजार के समग्र पुनर्विकास की मांग करते हुए कहा कि बाजार का सौंदर्यीकरण और आधुनिक ढांचे के अनुसार पुनर्निर्माण किया जाए, ताकि यह देश और दुनिया में एक आदर्श थोक बाजार के रूप में स्थापित हो सके।


