Saket Court Strike: साकेत कोर्ट में वकीलों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी, उपराज्यपाल के आदेश की वापसी की मांग तेज
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
नई दिल्ली, दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के हालिया आदेश के खिलाफ वकीलों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी के अलग-अलग कोर्टों में पिछले पांच दिनों से वकीलों की हड़ताल जारी है। इसी क्रम में साउथ दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर में भी अधिवक्ता हड़ताल पर डटे हुए हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। वकीलों का साफ कहना है कि जब तक उपराज्यपाल का नया आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
आज साकेत कोर्ट परिसर में स्थिति पूरी तरह से जमीनी आंदोलन जैसी दिखी। वकीलों ने एकजुट होकर ऐलान किया कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो वे सिर्फ कोर्ट परिसर तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगला कदम रोड जाम करने का होगा और यदि फिर भी समाधान नहीं निकला तो मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के आवास का घेराव भी किया जाएगा।
साकेत बार एसोसिएशन से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि न्याय की उम्मीद हमेशा कोर्ट से की जाती है, न कि पुलिस से। वकीलों का तर्क है कि अगर पुलिसकर्मी थानों से ही न्याय की भूमिका निभाने लगेंगे तो आम नागरिकों को कोर्ट से मिलने वाला न्याय प्रभावित होगा। इसी कारण वे उपराज्यपाल के आदेश को न्यायिक स्वतंत्रता और वकीलों की भूमिका पर सीधा प्रहार मानते हैं।
एडवोकेट ओम शर्मा और सीमा चौधरी ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि यह आदेश न केवल वकीलों के कामकाज को बाधित करेगा बल्कि आम नागरिकों के न्याय पाने के अधिकार को भी प्रभावित करेगा। वहीं एडवोकेट विकास शर्मा और इलामणि महापात्र ने जोर देकर कहा कि उपराज्यपाल को इस फैसले पर पुनर्विचार कर तुरंत आदेश को वापस लेना चाहिए।
हड़ताल के पांचवें दिन कोर्ट का कामकाज लगभग ठप रहा। हजारों वादकारी अपने मामलों के समाधान के लिए आए, लेकिन हड़ताल के कारण निराश लौटे। अदालतों में केवल अति आवश्यक मामलों को ही निपटाया जा रहा है।



