Shankaracharya Controversy: हिस्ट्रीशीटर पर झूठे यौन शोषण आरोप गढ़ने का प्रलोभन देने का आरोप
रिपोर्ट: आशीष कुमार
वाराणसी से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को कथित रूप से झूठे यौन शोषण के आरोप में फंसाने की साजिश रचे जाने का दावा किया गया है। यह मामला उस समय सार्वजनिक हुआ जब एक व्यक्ति ने स्वयं आगे आकर पूरी घटना का खुलासा किया और लिखित बयान भी सौंपा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शाहजहांपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित रविवार सायंकाल वाराणसी के केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ पहुंचे और वहां मौजूद पत्रकारों के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिस्ट्रीशीटर आशुतोष पाण्डेय ने अपने एक सहयोगी के माध्यम से उनसे संपर्क किया और फोन पर बातचीत के दौरान कथित रूप से यह प्रस्ताव दिया कि वे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यह आरोप लगा दें कि बद्रीनाथ में उनकी छोटी बच्ची के साथ यौन शोषण हुआ था। इसके बदले आर्थिक सहयोग देने का प्रलोभन दिया गया।
रमाशंकर दीक्षित ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनके पिता दंडी संन्यासी थे और धार्मिक संस्कारों के कारण वे किसी संत पर झूठा आरोप लगाने की कल्पना भी नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्पष्ट शब्दों में प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और कहा कि वे झूठे आरोप लगाकर किसी को फंसाने का पाप नहीं करेंगे।
दीक्षित के अनुसार, प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद उन्हें कथित तौर पर धमकी भी दी गई। उन्होंने दावा किया कि आशुतोष पाण्डेय की ओर से कहा गया कि यदि वे सहयोग नहीं करेंगे तो अन्य रास्ते भी अपनाए जा सकते हैं।
बताया जा रहा है कि रमाशंकर दीक्षित ने पूरी घटना को सादे कागज पर लिखकर, अपने हस्ताक्षर के साथ, शंकराचार्य जी को सौंप दिया है। यह दस्तावेज अब आगे की संभावित कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
घटना के सार्वजनिक होने के बाद वाराणसी सहित धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल इस मामले में संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुलिस में दर्ज किसी औपचारिक शिकायत की जानकारी सामने नहीं आई है। यदि शिकायत दर्ज होती है तो जांच एजेंसियां आरोपों और प्रत्यारोपों की सत्यता की जांच करेंगी।
यह मामला धार्मिक व्यक्तित्वों के खिलाफ झूठे आरोप गढ़ने की संभावित साजिश और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं को लेकर कई सवाल खड़े करता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण में क्या रुख अपनाता है और आगे की कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है।


