नई दिल्ली : निजी संस्थानों (Private Sectors) में काम करनेवाले लोगों में काम को लेकर तनाव (Work Related Stress) आम बात है। यहाँ कार्यरत लोगों (Employee of Private Sectors) पर काम का इतना बोझ (Work Load) होता है कि कभी-कभी वो बाहरी दुनिया से बिलकुल कट से जाते हैं। काम के बोझ से उत्पन्न तनाव से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बारे में तो आपने सुना ही होगा, लेकिन इस तनाव से मौत (Death due to work load) की खबर शायद ही कभी सुनी हो। मामला महाराष्ट्र के पुणे (Pune Maharashtra) का है, जहाँ एक नामचीन कंपनी में काम करने वाली युवती की काम के प्रेशर से मौत हो गयी। युवती की मौत (Death of young employee) के बाद से देश में कंपनियों के वर्क कल्चर (work culture in private sectors) को लेकर बहस शुरू हो गई है। सरकार (government of india) ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और श्रम विभाग द्वारा मामले की जांच की बात भी कही जा रही है।
20 जुलाई को हुई मौत, माँ के पत्र से मीडिया के सामने आया मामला
दरअसल, पुणे की ईवाई कंपनी (Ernst & Young) में केरल की रहने वाली 26 साल की एना सेबेस्टियन पिरेयिल (Chartered Accountant Anna Sebastian Perayil) ने मार्च 2024 में कंपनी में काम शुरू किया था। एना की मौत 20 जुलाई को हुई थी, लेकिन उसकी माँ द्वारा पत्र लिखकर कंपनी पर जब गंभीर आरोप लगाए गए, तब ये मामला मीडिया के सामने आया, जिसके बाद ईवाई कंपनी को लेकर लोगों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। एना की मां अनिता ऑगस्टिन ने ईवाई के भारत प्रमुख राजीव मेमानी को पत्र लिखकर कंपनी की कार्य संस्कृति पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
माँ ने पत्र में कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप
एना की मां अनिता ऑगस्टिन (Anita Augustine) ने पत्र में लिखा कि एना ने नवंबर 2023 में सीए की परीक्षा पास की थी। मार्च 2024 में ईवाई में काम शुरू किया। वह एनर्जी से भरपूर थी। इतनी प्रतिष्ठित कंपनी में काम मिलने पर खुश थी, लेकिन सिर्फ चार महीने बाद मेरी दुनिया उजड़ गई, जब एना की मौत की खबर मिली। सबसे दुखद यह है कि उसके अंतिम संस्कार में कंपनी से कोई नहीं पहुंचा। बेटी की पहली नौकरी होने के कारण एना बगैर थके कंपनी की उम्मीदों को पूरा करने में लगी रही। लगातार काम करने से (toxic work culture) उसके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गहरा असर हुआ। नौकरी लगने के कुछ समय बाद ही एना को एंग्जायटी, नींद न आना, तनाव जैसी परेशानियां होने लगी थीं। रविवार को भी कर्मचारियों को काम में झोंके रखना कोई सही नहीं ठहरा सकता।
अपने पत्र के अंत में अनीता ने कंपनी से जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया। उन्होंने लिखा, ‘नए लोगों पर इस तरह के कमर तोड़ने वाले काम का बोझ डालना, उन्हें दिन-रात काम करने के लिए मजबूर करना, यहां तक कि रविवार को भी, इसका कोई औचित्य नहीं है…। एना की मौत से ईवाई को जगने की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि यह पत्र आप तक गंभीरता के साथ पहुंचेगा। मुझे उम्मीद है कि मेरे बच्चे का अनुभव वास्तविक परिवर्तन की ओर ले जाएगा ताकि किसी अन्य परिवार को उस दुःख और आघात को सहन न करना पड़े जिससे हम गुजर रहे हैं।’
सोशल मीडिया पर निजी कंपनियों के वर्क कल्चर को लेकर छिड़ी बहस
मामले ने सोशल मीडिया पर अलग ही जंग छेड़ दी है। यूजर्स दफ्तरों में काम के माहौल को बेहतर करने की मांग कर रहे हैं। कई लोग इसे लेकर दबाव झेलने की क्षमता पर काम करने की सलाह दे रहे हैं। कई लोगों ने ईवाई जैसी कंपनियों में सुधार की मांग की है। कई लोग बेहतर मानसिक स्वास्थ्य, मानवीय कार्य स्थिति और युवा पेशेवरों पर दबाव का पुनर्मूल्यांकन करने की मांग भी कर रहे हैं। एक ट्वीट में यूजर ने लिखा, ‘यह कहा जाना चाहिए कि देर तक काम करने की संस्कृति और अधिक काम करने को न केवल बिग-4, बल्कि कई कॉरपोरेट्स में बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। इसे आदर्श के रूप में देखने की गलत परंपरा शुरू हो गई है। क्या आपको नारायण मूर्ति का 70 घंटे का कार्य सप्ताह याद है?’


