Monday, March 9, 2026

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Psychology of a Rapist : कैसी होती है बलात्कारियों की मानसिकता और क्यों होते हैं बलात्कार ?

Psychology of a Rapist : कहते हैं कि किसी देश की सभ्यता और संस्कृति (Civilization and Culture) का स्तर इस बात से मापा जाता है कि उस देश के लोगों का महिलाओं व बुजुर्गों (Women & Senior Citizen) के प्रति व्यवहार कैसा है। भारत (India) जैसे देश में, जहाँ महिलाओं को देवी का दर्ज़ा दिया जाता है और शक्ति का प्रतीक (Symbol of Power) माना जाता है, वही बुजुर्गों को अभिभावक (Guardians) से ज्यादा समाज के धरोहर (heritage of society) के रूप में मान-सम्मान मिलता है, लेकिन विगत कुछ वर्षों में जिस तरह से महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाओं (Rape Incident) में इज़ाफ़ा देखने को मिला है और देश में लगातार वृद्धाश्रम (old age home) की संख्या बढ़ती जा रही है, वो किसी भी समाज के लिए गर्व का विषय तो कतई नहीं हो सकता। देश के दिल दिल्ली में घटित निर्भया कांड (Nirbhaya Case of Delhi) हो या फिर कोलकाता में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म (Kolkata Rape Case) की वारदात, ऐसी घटनाएँ न सिर्फ सिस्टम की विफलता उजागर करती है, बल्कि एक समाज के तौर पर हमारे व्यवहार पर भी कई सवालिया निशान खड़े करती है और हमारी सभ्यता व संस्कृति को कठघरे में कड़ी करती है।

दुष्कर्म की वारदात से न सिर्फ दुष्कर्म पीड़िता की अस्मत तार-तार होती है, बल्कि वो विश्वास व अपेक्षाएं भी तार-तार होती है, जिसे भारतीय समाज ने सदियों से निभाई गयी परंपरा से अर्जित की है, ये किसी समाज का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है। देश में वृद्धाश्रम की बढ़ती संख्या का कारन क्या है, इसके बारे में अहम अगले पोस्ट में विस्तार से बात करेंगे, आज हम इस बात को जानने और समझने की कोशिश करेंगे कि बलात्कार के बढ़ते मामलों (increasing cases of rape) की वजह क्या है और बलात्कारियों की मानसिकता क्या होती है ? आखिर किस दुर्भावना से ग्रस्त होकर कोई व्यक्ति इस तरह के शर्मनाक और जघन्य कृत्य को अंजाम देता है ?

Psychology of a Rapist : अपराध बोध की भावना

मनोविज्ञान (Psychology) के हिसाब से देखें तो सामाजिक और न्यायिक स्तर पर बने नियम-कानून (Law & Order) को लेकर लोगों के मन में भय व्याप्त रहता है कि अगर इन नियमों का उल्लंघन किया जाए तो दंड भी मिलेगा, लेकिन एक बलात्कारी की मानसिकता (Psychology of Rapist) अपराध बोध (guilty feeling) से मुक्त होता है। इसका मतलब ये है कि बलात्कार जैसे वारदात को अंजाम देनेवाले व्यक्ति को अपने अपराध के प्रति कोई ग्लानि नहीं होती, यहाँ तक उसे ऐसा भी लगता है कि उसने कोई अपराध किया ही नहीं। जाहिर सी बात है कि जब कोई इंसान अपराध बोध से ही मुक्त हो तो फिर उसे उस अपराध के लिए मिलने वाले सजा से भी भय नहीं होगा और यही कारण है कि ऐसे लोग इस तरह की वारदात को अंजाम देते हैं।

Psychology of a Rapist : आखिर क्यों कोई इंसान अपराध बोध से मुक्त होता है ?

हर वो इंसान जो सामाजिक परिवेश (social environment) में पला-बढ़ा है, उसे सही-गलत का बोध होता है और इसी आधार पर उसका व्यवहार परिलक्षित होता है। लेकिन क्या हो, जब समाज किसी नौनिहाल को सही-गलत का बोध ही न करा सके ? हाल के समय में जिस तरह से एकल परिवारों (Single Family) का प्रचलन बढ़ा है और घर की महिलाएं भी कामकाजी (Working Women) हो रही है, उससे बच्चों को सामाजिक परिवेश तो दूर, पारिवारिक परिवेश भी नहीं मिल पाता। ऐसे में बाल मन अपने हिसाब से सही-गलत का आकलन करता है और उस आधार पर उसके व्यवहार परिलक्षित होते हैं। एक ऐसा बच्चा जिसे ये पता ही न हो कि वो जो कर रहा है वो अपराध है, तो फिर उस अपराध के प्रति ग्लानि या उसे अपराध बोध भी नहीं होगा। ऐसी स्थिति में वो बच्चा व्यस्क होकर बलात्कार ही नहीं बल्कि अन्य तरह के अपराधों में भी संलिप्त होता है और उसे इस बात का आभास भी नहीं होता कि वो जो कर रहा है वो गलत है या अपराध है।

Psychology of a Rapist : गलत कार्य के लिए मिलने वाले सजा की भय से मुक्त होने की भावना

ऊपर हमने अपराध बोध की भावना (free from guilt) से मुक्त होने के कारणों के बारे में चर्चा कि, लेकिन एक और कारण है जो लोगों को अपराध करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति को ये पता होता है कि वो जो कर रहा है वो अपराध है, लेकिन गलत कार्य के लिए मिलने वाले सजा की भय से मुक्त होने की भावना से ग्रस्त होकर वो जानबूझ कर ऐसे कृत्य को अंजाम देता है। गलत कार्य के लिए मिलने वाले सजा की भय से मुक्त होने की भावना से कोई कैसे ग्रस्त होता है ? इसके कई कारन हो सकते हैं, लेकिन जो सबसे प्रमुख कारण है वो है आपराधिक माहौल (criminal environment) में पला-बढ़ा होना या फिर ऐसे माहौल में रहना जहाँ वो आये दिन आपराधिक कृत्यों का शिकार होता रहा हो। यहाँ वो बात लागु होती है, जिसमें कहा जाता है कि किसी को इतना भी मत डराओ कि वो डरना ही छोड़ दे। आये दिन होने वाले अत्याचारों से तंग आया कोई व्यक्ति एक दिन डरना छोड़ देता है और फिर वही इंसान समाज के लिए नासूर बन जाता है।

महिलाओं को उपभोग की वस्तु क्यों समझते हैं बलात्कारी ?

मनोवैज्ञानिक (psychologist) की मानें, तो कोई भी व्यक्ति बलात्कार क्यों करता है, उसके पीछे कई कारण काम करते हैं। ऐसे मामलों में अभियुक्तों का बचपन, माता-पिता का बर्ताव, घर में कोई शराब या नशा करता हो या फिर उसके साथ बचपन में यौन व्यवहार की घटना तो नहीं घटी हो। इन लोगों में ग़ुस्सा काफ़ी होता है। ये एंटी सोशल पर्सनेलिटी (anti social personality) या साइकोपैथिक (Psychopathic) होते हैं यानी इन्हें अपराध करके दुख का बोध नहीं होता। अगर ये लोग बलात्कार करते हैं, तो किसी को दर्द देकर यौन हिंसा करने में इन्हें मज़ा आता है। इस तरह से काम को अंजाम देने वाले ज़्यादातर लोग बचपन में यौन हिंसा का शिकार हुए होते हैं या परिवार में अकेलापन झेल चुके होते हैं।

किसी भी व्यक्ति की सैक्सुअल फ़ेंटेसी (sexual fantasy) पर निर्भर करता है कि वो महिलाओं के साथ करना चाहते हैं या बच्चों के साथ। ऐसी बातें किसी के भी दिमाग में अचानक नहीं आती है बल्कि ये प्रवृत्ति धीरे-धीरे बनती है। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें 5 साल से कम उम्र तक की बच्चियों के साथ में दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया है। ऐसे लोग एक अपराधी से ज्यादा बीमार मानसिकता (sick mentality) के शिकार होते हैं, जिसे उसने अपने परिवार या फिर समाज से अर्जित किया होता है।

समाज के अस्तित्व को चुनौती देती है बलात्कार की घटनाएं ?

बेशक, हम आर्थिक रूप से संपन्न (economically prosperous) हो जाएं लेकिन अगर हम अपने बच्चे को सही-गलत का ज्ञान नहीं दे रहे और उसे इस बात की तालिम नहीं दे रहे कि महिलाओं व बुजर्गों के प्रति हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए तो वही बालक व्यस्क बनकर महिलाओं को सिर्फ व्यसन की सामग्री समझेगा। ये एक परिवार व समाज का मूल कर्त्वय है कि वो बच्चों को इसका ज्ञान दे कि नारी महज उपभोग की सामग्री नहीं, बल्कि वो इस सृष्टि की निर्माता है, जिससे हमारा अस्तित्व जिन्दा है। और अगर हम ऐसा नहीं कर पाते हैं, और हमारे समाज का कोई व्यक्ति बलात्कारी बनता है तो इस तरह की घटनाओं के लिए कही न कही समाज व परिवार भी जिम्मेदार होता है। फिर क्या हम सामाजिक स्तर पर बलात्कार की घटनाओं की जिम्मेदारी लेकर सिस्टम से ये अपील कर सकते हैं कि समूचे समाज को दोषी मानकर फांसी पर लटका दिया जाए ?

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