Art Exhibition Delhi: प्रकृति की सुंदरता को दर्शाती है कला – परमजीत सिंह पम्मा
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
नव श्री आर्ट एंड कल्चर संगठन द्वारा दिल्ली स्थित आर्टीजन आर्ट गैलरी, प्यारे लाल भवन, बहादुर शाह ज़फर मार्ग, नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर की सामूहिक कला प्रदर्शनी ‘आर्ट न आर्ट’ का भव्य आयोजन अत्यंत उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। इस राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में अखिल भारतीय चित्रकला प्रतियोगिता के चयनित कलाकारों सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए कुल 32 कलाकारों ने सहभागिता की और अपनी रचनात्मक कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनी के मुख्य अतिथि नेशनल अकाली दल के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कला प्रकृति की सुंदरता, मानवीय भावनाओं और जीवन के अनुभवों को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। कला एक ऐसी सार्वभौमिक भाषा है जो शब्दों की सीमाओं से परे जाकर सीधे मनुष्य के हृदय से संवाद करती है। चित्रकला, संगीत, नृत्य, साहित्य, नाटक, मूर्तिकला और फिल्म जैसे कला के विविध रूप समाज को जोड़ने और सोच को सकारात्मक दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि वर्तमान समय में जब युवा वर्ग ऑनलाइन गेम और नशे जैसी गतिविधियों की ओर आकर्षित हो रहा है, तब कला के माध्यम से उन्हें रचनात्मक और सकारात्मक मार्ग पर लाया जा सकता है। उन्होंने नव श्री आर्ट एंड कल्चर संगठन के अध्यक्ष श्री मोहित मनोचा की सराहना करते हुए कहा कि देशभर के कलाकारों को एक ही मंच पर लाकर प्रदर्शनी का आयोजन करना अत्यंत प्रशंसनीय प्रयास है। इस प्रदर्शनी में प्रस्तुत कलाकृतियों को देखकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सजीव झलक दिखाई देती है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि परमजीत सिंह पम्मा का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। प्रदर्शनी में शामिल सभी कलाकारों में अपने सृजन को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करने को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। नव श्री आर्ट एंड कल्चर संगठन की ओर से सभी प्रतिभागी कलाकारों को सहभागिता प्रमाण-पत्र, स्मृति-चिह्न (ट्रॉफी) और प्रदर्शनी कैटलॉग भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे कलाकारों का मनोबल और आत्मविश्वास और अधिक बढ़ा।
संगठन के अध्यक्ष श्री मोहित मनोचा ने कहा कि संस्था का निरंतर प्रयास रहता है कि उभरते और स्थापित कलाकारों को उनकी प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप एक सशक्त मंच प्रदान किया जाए, ताकि वे कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकें और आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह की राष्ट्रीय कला प्रदर्शनियां कलाकारों के लिए न केवल प्रेरणा का स्रोत होती हैं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी मजबूती देती हैं।
इस राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में झारखंड से अजय किशोर नाथ पांडेय और अनूप कुमार दुबे, महाराष्ट्र से अंजना संजय घैसास, आर्या संदीप मुले और कृपा शाह, उत्तर प्रदेश से अपराजिता राय और पूजा, बिहार से अरुण कमती, राजेश राठौर और राजीब अग्रवाल, नई दिल्ली से आयुष अग्निहोत्री, ध्रुव, महेश कुमार, मोहित खड़कवाल, पल्लवी सिन्हा, प्रदीप हलदर, राशि गुप्ता, रविंद्र कुमार, सोहिनी बनर्जी, सूरज कुमार, सुरिंदर कालेर और ज़किया राशिद, पंजाब से गुरिंदर पाल सिंह और जसप्रीत मोहन सिंह, तमिलनाडु से एम. सुरेश कुमार, असम से मेघा जैन, हरियाणा से रिया गुप्ता, तेलंगाना से सरदिंदु दिंडा तथा राजस्थान से नम्रता ब्रिजे और सोनम सहित अनेक कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
यह प्रदर्शनी न केवल कला प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव रही, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति की विविधता को एक मंच पर प्रस्तुत करने का सशक्त उदाहरण भी बनी।


