चाकू, गुस्सा और नाबालिग दिमाग: शास्त्री नगर मेट्रो की वारदात ने खोली खौफनाक हकीकत
शास्त्री नगर मेट्रो स्टेशन पर 26 जनवरी 2026 को जो हुआ, वह सिर्फ एक हमला नहीं था, बल्कि एक खौफनाक संकेत था — कि अपराध अब उम्र नहीं देखता। 27 वर्षीय युवक पर दिनदहाड़े चाकुओं से हमला किया गया और कुछ ही मिनटों में मेट्रो स्टेशन डर और अफरा-तफरी का अड्डा बन गया।
घायल युवक को पहले दीप चंद बंधु अस्पताल और फिर गंभीर हालत में आरएमएल अस्पताल रेफर किया गया। मामला दर्ज होते ही दिल्ली पुलिस की एनएसपी मेट्रो टीम हरकत में आई। इंस्पेक्टर सुशीला के नेतृत्व में तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी फुटेज और ज़मीनी इनपुट खंगाले गए।
कुछ ही घंटों में पुलिस ने शास्त्री नगर की हनुमान गली से पाँच नाबालिगों को दबोच लिया — सभी की उम्र महज़ 16 से 17 साल।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि हमला किसने किया, बल्कि यह है कि इतनी कम उम्र में हाथ में किताब की जगह चाकू क्यों है? क्या यह गुस्सा है, गैंग की ताकत दिखाने की भूख, सोशल मीडिया का ज़हर या टूटते पारिवारिक ढांचे की देन?
किशोर न्याय अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया चल रही है, फॉरेंसिक जांच जारी है, लेकिन समाज के कटघरे में खड़ा सवाल और भी बड़ा है —
अगर 16 साल का बच्चा हत्यारा बनने लगे, तो असली घायल कौन है… पीड़ित या हमारा भविष्य?
दिल्ली पुलिस ने अपराधियों को पकड़ लिया, मगर इस सोच को कौन गिरफ्तार करेगा?


