Akshaya Tritiya 2026: रिकॉर्ड कीमतों के बीच भी मजबूत मांग, ₹20,000 करोड़ व्यापार का अनुमान
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
“कभी न घटने वाली समृद्धि” का प्रतीक मानी जाने वाली Akshaya Tritiya इस वर्ष भी देशभर में आस्था और आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में उभरी है। सोना-चांदी की रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद इस अवसर पर करीब ₹20,000 करोड़ के व्यापार का अनुमान जताया गया है, जो पिछले वर्ष के ₹16,000 करोड़ से उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। यह आंकड़े Confederation of All India Traders ने जारी किए हैं।
दिल्ली में अकेले लगभग ₹6,000 करोड़ के कारोबार का अनुमान है। चांदनी चौक से सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री Praveen Khandelwal ने कहा कि अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है, लेकिन इस बार बढ़ती कीमतों के कारण खरीद के तरीकों में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है।
इस साल सोने की कीमतें लगभग ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई हैं, जो पिछले वर्ष करीब ₹1 लाख थी। वहीं चांदी की कीमत ₹85,000 प्रति किलो से बढ़कर लगभग ₹2.55 लाख प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। इन बढ़ती कीमतों के बावजूद मांग में कमी नहीं आई है, बल्कि उपभोक्ता अब सोच-समझकर और बजट के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष B C Bhartia ने बताया कि ज्वैलर्स ने भी बदलते रुझानों के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव किया है। हल्के वजन के आभूषण, रोजमर्रा के डिजाइन, छोटे गोल्ड कॉइन और आकर्षक ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को जोड़ा जा रहा है।
All India Jewellers and Goldsmith Federation के राष्ट्रीय अध्यक्ष Pankaj Arora के अनुसार, ₹16,000 करोड़ के सोने के व्यापार का मतलब वर्तमान कीमतों पर करीब 10 टन सोने की बिक्री है। देशभर में 2 से 4 लाख ज्वैलर्स के हिसाब से प्रति ज्वैलर औसतन केवल 25 से 50 ग्राम सोने की बिक्री हो रही है, जो खपत में गिरावट को दर्शाती है।
इसी तरह ₹4,000 करोड़ के चांदी व्यापार का अर्थ करीब 157 टन चांदी की बिक्री है, जिसमें प्रति ज्वैलर औसतन 400 से 800 ग्राम की बिक्री हो रही है। इससे साफ है कि व्यापार का कुल मूल्य बढ़ा है, लेकिन वास्तविक मात्रा में कमी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब उपभोक्ता पारंपरिक खरीद के साथ-साथ आधुनिक निवेश विकल्पों की ओर भी रुख कर रहे हैं। डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) जैसे विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये अधिक सुरक्षित और लचीले निवेश के रूप में देखे जा रहे हैं।
साथ ही कैट और एआईजेजीएफ ने ज्वैलर्स से हॉलमार्किंग (HUID) का सख्ती से पालन करने की अपील की है, ताकि उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहे। ग्राहकों को भी खरीदारी के दौरान शुद्धता और प्रमाणिकता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।
अक्षय तृतीया 2026 अब केवल परंपरा का प्रतीक नहीं, बल्कि आस्था और आर्थिक समझदारी के संतुलन का उदाहरण बनकर सामने आ रही है, जहां लोग सीमित लेकिन सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं।



