badri vishal Temple opening: बदरीविशाल मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले, वैदिक मंत्रों और धार्मिक विधि-विधान के साथ हुआ शुभारंभ
रिपोर्ट: आशीष कुमार
चमोली, उत्तराखंड | 23 अप्रैल 2026: पवित्र हिमालयी धाम में स्थित बदरीविशाल मंदिर के कपाट आज वैशाख शुक्ल सप्तमी के पावन मुहूर्त में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विधिवत रूप से खोल दिए गए। प्रातः 6:15 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के बीच मंदिर के कपाट खुलने का यह शुभ क्षण हजारों श्रद्धालुओं और संत समाज की उपस्थिति में संपन्न हुआ। कपाट खुलने से पूर्व द्वार पूजा, पंचांग पूजन और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसमें वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
इस पावन अवसर पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके सान्निध्य में संपूर्ण द्वार पूजन वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न हुआ। परंपरा के अनुसार नर पूजा की जिम्मेदारी रावल जी द्वारा निभाई गई, जिससे मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपरा का पालन सुनिश्चित हुआ।
इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे और उन्होंने कपाट खुलने की इस पवित्र प्रक्रिया को राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का महत्वपूर्ण क्षण बताया। मंदिर समिति के अध्यक्ष सहित कई गणमान्य अधिकारी और संत समाज भी इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने।
कपाट उद्घाटन के दौरान शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती जी ने कहा कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही अब अगले छह माह तक सभी सनातन धर्मावलंबियों को भगवान बदरी विशाल के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि यह समय आध्यात्मिक साधना, श्रद्धा और भक्ति का विशेष काल होता है, जब भक्तजन हिमालय की गोद में स्थित इस पवित्र धाम में आकर भगवान विष्णु के दर्शन कर सकते हैं।
इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में संत समाज और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिनमें स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती, स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि, स्वामी श्रीनिधिरव्यानन्द सागर, स्वामी अप्रमेयशिवसाक्षात्कृतानन्द गिरिः सहित अनेक संत शामिल थे। साथ ही मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमन्त द्विवेदी, विजय कपरवाण, डा. बृजेश सती, अशोक टोडरिया, आशुतोष डिमरी, भास्कर डिमरी, अनिल भारद्वाज, किरण जानी, देवानन्द शुक्ल, देवेन्द्र पाण्डेय, सुरेश जानी सहित कई अन्य गणमान्य भक्त भी उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती जी को वर्ष 2022 में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया था और तब से वे निरंतर धार्मिक परंपराओं और सनातन संस्कृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इस पावन अवसर पर पूरा बदरीनाथ धाम “जय बदरी विशाल” के उद्घोष से गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया। कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दर्शन के लिए उमड़ पड़ीं और अगले छह महीनों तक चलने वाली तीर्थ यात्रा की आध्यात्मिक शुरुआत हो गई।



