मैं, राकेश कुमार यादव, फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में, एक सनातनी नागरिक होने के नाते आप सभी देशवासियों, साथियों, संस्थाओं के अध्यक्षों, महामंत्रियों, और सम्मानित पदाधिकारियों से अपने दिल और आत्मा की बात साझा कर रहा हूँ। यह एक प्रार्थना और अपील है कि हम अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करें।
भगवान की मूर्ति सम्मान – अतिथियों को मूर्ति भेंट न करें
मैं आप सभी से अनुरोध करता हूँ कि जब भी आप किसी कार्यक्रम का आयोजन करें, तो अतिथियों को भगवान की मूर्ति, कैलेंडर, या ऐसी कोई वस्तु भेंट न करें। इसी तरह, यदि आप किसी कार्यक्रम में अतिथि हैं, तो भगवान की मूर्ति को स्वीकार करने के बजाय उसे सम्मानपूर्वक चरण वंदना कर वापस कर दें। भगवान का स्वरूप वंदनीय और पूजनीय है। यदि हम उनकी पूजा नहीं कर सकते या उन्हें उचित स्थान नहीं दे सकते, तो यह आत्मग्लानि का कारण बनता है। यह हमारे धर्म, आत्मा, और संस्कारों के साथ अन्याय है।
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ई-कार्ड पर्यावरण संरक्षण – आमंत्रण कार्ड पर भगवान की तस्वीर न लगाएं
मैं यह भी अपील करता हूँ कि मांगलिक कार्यों के लिए आमंत्रण कार्ड पर भगवान की तस्वीर न लगाई जाए। जब कार्ड पर भगवान की मूर्ति होती है, तो कुछ समय बाद वह कार्ड कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है, जो हमारे धार्मिक सम्मान के खिलाफ है। इसके बजाय, ई-कार्ड का उपयोग करें। ई-कार्ड न केवल हमारे धार्मिक मूल्यों की रक्षा करते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देते हैं। कागज पेड़ों की लुगदी से बनता है, और ई-कार्ड अपनाकर हम अपने पेड़ों को बचा सकते हैं।
इस मुहिम को जन जागरण का रूप दें
मैं आप सभी से इस मुहिम को आगे बढ़ाने और इसे एक जन जागरण का रूप देने की प्रार्थना करता हूँ। यदि आपको यह विचार अच्छा लगता है, तो इसे अपने समुदाय में फैलाएं। यह न केवल हमारे धार्मिक सम्मान को बनाए रखेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा। मैं व्यक्तिगत रूप से आपका बहुत-बहुत आभारी रहूँगा।
निष्कर्ष: सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश
यह अपील हमारे धार्मिक सम्मान, सांस्कृतिक मूल्यों, और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी को दर्शाती है। भगवान की मूर्ति सम्मान और ई-कार्ड अपनाने की यह मुहिम हमारे समाज को बेहतर बनाने का एक छोटा लेकिन प्रभावी कदम हो सकता है। आइए, इसे मिलकर आगे बढ़ाएं।



