Traffic Challan: नए चालान निस्तारण तंत्र का फैसला फिलहाल टला, दिल्ली सरकार ने अधिसूचना के अमल पर लगाई रोक
रिपोर्ट: आशीष कुमार
नई दिल्ली। दिल्ली की जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति और दिल्ली सरकार के बीच ट्रैफिक चालानों के निस्तारण के लिए प्रस्तावित नए तंत्र को लेकर हुई बैठक के बाद बड़ा फैसला सामने आया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री, कानून मंत्री और परिवहन मंत्री के साथ हुई विस्तृत चर्चा के बाद प्रस्तावित नई व्यवस्था को फिलहाल लागू करने पर रोक लगा दी गई है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक कानूनी बिरादरी की ओर से उठाई गई चिंताओं और सुझावों पर विचार कर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला जाता।
ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की कोऑर्डिनेशन कमेटी के प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली के मुख्यमंत्री की ओर से बैठक के लिए बुलाया गया था। बैठक में ट्रैफिक चालानों के निस्तारण के लिए लागू किए जाने वाले नए मैकेनिज्म को लेकर वकीलों की ओर से उठाए गए विभिन्न मुद्दों और आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
समन्वय समिति की ओर से बताया गया कि कानूनी बिरादरी को नई व्यवस्था के कुछ प्रावधानों को लेकर गंभीर आपत्तियां और चिंताएं थीं। समिति का कहना है कि इन मुद्दों को सरकार के सामने विस्तार से रखा गया और नए तंत्र के व्यावहारिक, कानूनी तथा प्रक्रियात्मक पहलुओं पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित अधिसूचना के क्रियान्वयन को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया। यह रोक पूरी तरह अंतिम वापसी के रूप में नहीं बल्कि आगे की चर्चा और समाधान तक अस्थायी रोक के रूप में बताई गई है। सरकार की ओर से समिति के सुझावों और चिंताओं पर आगे विचार किया जाएगा।
समन्वय समिति के अनुसार, सरकार ने यह निर्णय लिया है कि एनसीटी दिल्ली में संबंधित अधिसूचना को उस समय तक लागू नहीं किया जाएगा, जब तक सभी पक्षों के साथ उचित विचार-विमर्श के बाद ठोस समाधान नहीं निकल जाता। इससे ट्रैफिक चालानों के नए निस्तारण तंत्र को लेकर तत्काल पैदा हुआ विवाद फिलहाल टल गया है।
इस फैसले के बाद जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की ओर से 24 सितंबर 2026 को प्रस्तावित विरोध मार्च और काम से विरत रहने का आह्वान भी स्थगित कर दिया गया है। यानी फिलहाल वकीलों की ओर से प्रस्तावित सामूहिक विरोध कार्यक्रम को रोक दिया गया है और आगे की बातचीत के लिए रास्ता खुला है।
समन्वय समिति ने स्पष्ट किया है कि वह अपने रुख पर कायम रहेगी। समिति की ओर से कहा गया है कि जब तक संबंधित अधिसूचना को वापस लेने या सभी चिंताओं का समाधान करने के संबंध में ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक वह अपने मुद्दे को लेकर प्रयास जारी रखेगी।
इस पूरे विवाद में दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। समिति ने प्रस्तावित व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर सामूहिक रूप से अपनी चिंता सरकार के सामने रखी थी। इसी क्रम में बैठक आयोजित की गई और अब सरकार की ओर से अधिसूचना के अमल को रोकने का निर्णय लिया गया है।
समन्वय समिति ने इस मुद्दे पर समर्थन देने वाली कानूनी संस्थाओं और अन्य संगठनों का भी आभार व्यक्त किया है। समिति की ओर से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, देशभर की अन्य बार एसोसिएशनों और परिवहन यूनियनों का धन्यवाद किया गया है। समिति के मुताबिक, इन संगठनों ने कानूनी बिरादरी की सामूहिक चिंताओं के समर्थन में एकजुटता दिखाई।
बैठक के बाद अब इस मामले में अगला चरण सरकार और बार एसोसिएशनों के बीच आगे होने वाली चर्चा पर निर्भर करेगा। नई व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों, ट्रैफिक चालानों के निस्तारण की प्रक्रिया और उससे संबंधित कानूनी पहलुओं पर दोनों पक्षों के बीच और विचार-विमर्श की संभावना है।
वकीलों के प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम के स्थगित होने से फिलहाल 24 सितंबर को होने वाली संभावित गतिविधियों पर विराम लग गया है। हालांकि, समन्वय समिति ने यह भी संकेत दिया है कि यदि उनकी प्रमुख चिंताओं का समाधान नहीं किया जाता है तो वे अपने रुख पर आगे भी कायम रहेंगे।
ट्रैफिक चालानों के निस्तारण की नई व्यवस्था को लेकर उठे इस विवाद ने अदालतों, वकीलों और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच समन्वय के महत्व को भी सामने रखा है। अब सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि सभी संबंधित पक्षों के सुझावों और आपत्तियों पर विचार करते हुए ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए, जिसे लागू करने को लेकर व्यापक सहमति बन सके।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह है कि दिल्ली में प्रस्तावित नए ट्रैफिक चालान निस्तारण मैकेनिज्म की अधिसूचना का अमल रोक दिया गया है। साथ ही 24 सितंबर को प्रस्तावित काम से विरत रहने और विरोध मार्च का कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया है। अब आगे की प्रक्रिया सरकार और समन्वय समिति के बीच होने वाली विस्तृत बातचीत से तय होगी।



