History of Lebanon : मिडिल ईस्ट के कई देश (Countries of Middle East) इस समय युद्ध की आग में झुलस रहे हैं। सबका एक साझा दुश्मन इज़रायल (Israel) है, जिसके खिलाफ कई देश लामबंद हैं, बावजूद इसके इज़रायल सभी देशों को लगातार मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। इस समय सबसे अधिक तबाही लेबनान (Lebanon) में मची हुई है, जहां इज़रायली सैनिक (Army of Israel) लगातार बमबारी कर रहे हैं और शहर दर शहर को मलबों के ढेर में तब्दील कर रहे हैं। इज़रायल की ये जंग आतंकी संगठन हिजबुल्लाह (Hezbollah) के खिलाफ है, जिसकी जद में लेबनान के आम नागरिक भी आ रहे हैं और लोगों का पलायन लगातार जारी है।
History of Lebanon : समृद्ध देश हुआ करता था लेबनान
आज जिस लेबनान को आतंक का हब (Hub of Terrorism) कहा जाता है, वो लेबनान कभी एक समृद्ध देश हुआ करता था। समृद्धि ऐसी कि उस समय इसे मिडिल ईस्ट का ‘स्विज़रलैंड’ कहा जाता था। लेबनान की राजधानी बेरूत (beirut) कभी दुनिया के सबसे अमीर सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र था, जहां आजकल सन्नाटा पसरा हुआ है। बेरूत में जहां हमेशा जश्न होता है वहां आजकल लोगों के जान के लाले पड़े हुए हैं। लेकिन एक समृद्ध देश किस तरह एक युद्धग्रस्त क्षेत्र में तब्दील हो गया ? आईये जानते हैं लेबनान के मिडिल ईस्ट के ‘स्विज़रलैंड’ से आतंक का हब बनने की कहानी।
ऐतिहासिक और राजनीतिक कारकों की वजह से अशांत हुआ लेबनान
लेबनान एक युद्धग्रस्त क्षेत्र बन गया क्योंकि कई ऐतिहासिक और राजनीतिक कारकों ने इसमें योगदान दिया। लेबनान की धार्मिक विविधता ने इसकी शुरुआत में ही समस्याएं पैदा कर दी थीं। देश की जनसंख्या में ईसाई, सुन्नी मुसलमान, शिया मुसलमान, और द्रूज जैसे समुदाय शामिल थे, जिनमें से प्रत्येक की अपनी अलग राजनीतिक और सामाजिक आकांक्षाएं थी।
फ्रांसीसी मंडेट के दौरान, लेबनान की सरकार में ईसाई समुदाय का वर्चस्व था, जिससे मुसलमानों में असंतोष फैल गया। इसके अलावा, फिलिस्तीनी शरणार्थियों की आमद ने देश की जनसांख्यिकी को बदल दिया और मुसलमानों की संख्या में वृद्धि हुई। इससे ईसाई समुदाय की राजनीतिक शक्ति खतरे में पड़ गई।
शीत युद्ध के दौरान, लेबनान में विभिन्न राजनीतिक दलों और मिलिशिया समूहों ने विभिन्न विदेशी शक्तियों का समर्थन प्राप्त किया, जिससे देश में और अधिक विभाजन हुआ। इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष ने भी लेबनान की स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया। इन सभी कारकों ने मिलकर लेबनान को एक युद्धग्रस्त क्षेत्र में बदल दिया, जहां विभिन्न समुदायों और राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष बढ़ता गया।
हिज़बुल्लाह के उदय से शुरू हुआ लेबनान का पतन
हिजबुल्लाह के उदय ने लेबनान के लिए कई चुनौतियाँ पेश की हैं। सबसे पहले, हिजबुल्लाह की स्थापना 1982 में लेबनान के गृहयुद्ध के दौरान हुई थी, जिसका उद्देश्य इज़राइल के आक्रमण का विरोध करना था। इस समूह ने अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आतंकवादी गतिविधियों का सहारा लिया, जिससे लेबनान में सुरक्षा स्थिति और भी जटिल हो गई।
हिजबुल्लाह के उदय ने लेबनान के राजनीतिक परिदृश्य को भी प्रभावित किया है। समूह ने अपने समर्थन के लिए ईरान पर निर्भरता को कम करने और लेबनान के भीतर अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की है। हालांकि, यह प्रयास लेबनान की राजनीतिक स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है।
इसके अलावा, हिजबुल्लाह के उदय ने लेबनान के संबंधों को इज़राइल के साथ भी प्रभावित किया है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और हिजबुल्लाह के हमलों ने संघर्ष को बढ़ावा दिया है। इससे लेबनान की सुरक्षा स्थिति और भी जटिल हो गई है। हिजबुल्लाह के उदय ने लेबनान के लिए कई चुनौतियाँ पेश की हैं। इससे लेबनान की सुरक्षा स्थिति, राजनीतिक परिदृश्य, और इज़राइल के साथ संबंध प्रभावित हुए हैं।


