Home State Delhi NCR Women leadership summit Delhi: अदालतों से बोर्डरूम तक महिलाएं गढ़ रहीं सशक्त नेतृत्व, IACC-SILF सम्मेलन में विकसित भारत में उनकी भूमिका पर जोर

Women leadership summit Delhi: अदालतों से बोर्डरूम तक महिलाएं गढ़ रहीं सशक्त नेतृत्व, IACC-SILF सम्मेलन में विकसित भारत में उनकी भूमिका पर जोर

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Women leadership summit Delhi: अदालतों से बोर्डरूम तक महिलाएं गढ़ रहीं सशक्त नेतृत्व, IACC-SILF सम्मेलन में विकसित भारत में उनकी भूमिका पर जोर

Women leadership summit Delhi: अदालतों से बोर्डरूम तक महिलाएं गढ़ रहीं सशक्त नेतृत्व, IACC-SILF सम्मेलन में विकसित भारत में उनकी भूमिका पर जोर

रिपोर्ट – हेमंत कुमार।

नई दिल्ली में आयोजित “सेलिब्रेटिंग वुमन लीडरशिप” सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि महिलाएं जन्मजात नेतृत्व क्षमता रखती हैं और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस सम्मेलन में कानून, स्वास्थ्य, ऊर्जा, सार्वजनिक नीति और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।

यह कार्यक्रम Indo‑American Chamber of Commerce और Society of Indian Law Firms के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। पूरे दिन चले इस सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और महिलाओं की बढ़ती नेतृत्व क्षमता, लैंगिक संतुलन तथा समावेशन की आवश्यकता पर विचार साझा किए।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि भारत तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महिलाएं अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में अनेक निर्भीक और प्रेरणादायी महिलाएं रही हैं, जिन्होंने नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता नूपुर शर्मा ने महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं और सरकार ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति में ‘शक्ति’ की अवधारणा को महिलाओं के सम्मान और सामर्थ्य का प्रतीक बताया।

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट और दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता सुवर्णा राज ने समाज में समावेशन और सोच में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता शारीरिक सीमाओं में नहीं बल्कि समाज की सोच में होती है। उन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए खेलों को बढ़ावा देने, पैरालंपियन खिलाड़ियों को प्रेरणा स्रोत के रूप में पहचान देने और समाज में रूढ़ियों को समाप्त करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में IACC की रीजनल काउंसिल सदस्य और भसीन एंड कंपनी एडवोकेट्स की सीनियर पार्टनर नीना गुप्ता ने कहा कि आज महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत नेतृत्व कर रही हैं, हालांकि कई बार समाज उन्हें अभी भी पीछे रखने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण कोई नारा नहीं बल्कि महिलाओं का मूल अधिकार है।

सम्मेलन के अध्यक्ष और IACC के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललित भसीन ने कहा कि संस्थान तब आगे बढ़ते हैं जब महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलता है। उन्होंने बताया कि IACC में क्षेत्रीय स्तर पर महिला नेतृत्व को प्राथमिकता दी जा रही है, जो संस्थान की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।

कार्यक्रम में IACC के क्षेत्रीय अध्यक्ष और S&A लॉ ऑफिसेज एलएलपी के काउंसल मनोज के. सिंह ने नेतृत्व से जुड़े विभिन्न अध्ययनों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं में स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता होती है और वे संगठनों को अधिक संवेदनशील और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ा सकती हैं।

इस दौरान IACC की रीजनल वाइस प्रेसिडेंट और DLF फाउंडेशन की चेयरपर्सन पिया सिंह ने कहा कि पुरुष और महिला ऊर्जा का संतुलन ही समाज को मजबूत बनाता है। जब दोनों समानता और सामंजस्य के साथ काम करते हैं, तभी एक बेहतर और संतुलित समाज का निर्माण संभव है।

स्वास्थ्य क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स की प्रबंध निदेशक उपासना अरोड़ा ने चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया और इतिहास में महिलाओं के नेतृत्व के कई प्रेरणादायी उदाहरणों का उल्लेख किया।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली दस महिलाओं को “वुमन लीडरशिप अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में राजी चंद्रु, कुमुदानी शर्मा, अमनदीप कौर, नूपुर शर्मा, ऋत्विका नंदा, नीलम वत्स, अनिका सिंघल, कविता निओगी, श्वेता भारती और प्रीति सूरी शामिल रहीं।

सम्मेलन में शिक्षा, कानूनी चुनौतियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका पर तीन विशेष सत्र भी आयोजित किए गए। इन सत्रों में विशेषज्ञों ने कहा कि लैंगिक समानता, नवाचार और समावेशी विकास के माध्यम से ही भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

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