Home State Kashi Religious Events: काशी में ब्रम्हलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी का 101वां वर्धन्ति महामहोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

Kashi Religious Events: काशी में ब्रम्हलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी का 101वां वर्धन्ति महामहोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

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Kashi Religious Events: काशी में ब्रम्हलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी का 101वां वर्धन्ति महामहोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

Kashi Religious Events: काशी में ब्रम्हलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी का 101वां वर्धन्ति महामहोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

रिपोर्ट: आशीष कुमार

वाराणसी, आज काशी में ब्रम्हलीन द्वयपीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का 101वां वर्धन्ति महामहोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के आदेशानुसार सन्तों, भक्तों और काशीवासियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।

महामहोत्सव का आरंभ स्वस्तिवाचन और गणेश पूजन से किया गया। इसके उपरांत ब्रम्हलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज की पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन किया गया। तत्पश्चात, वैदिक आचार्यों क्रमशः दीपेश दुबे, विनय भूषण तिवारी, ओम प्रकाश पाण्डेय, करुणा शंकर मिश्र, भूपेंद्र मिश्र, शिवकांत मिश्र और धीरज तिवारी के मार्गदर्शन में रुद्राभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद आरती और पुष्पांजलि अर्पित की गई, तथा चारों वेदों का पारायण भी किया गया। यजमान की भूमिका का सफलतापूर्वक निर्वहन कृष्ण कुमार द्विवेदी ने किया।

शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने जानकारी दी कि ब्रम्हलीन स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने स्वतंत्रता संग्राम में दो बार जेल भोगा, अकेले अपने प्रयासों से अंग्रेजों से पूरा गांव खाली करवाया, राम जन्मभूमि और राम मंदिर के फैसले को हिंदुओं के पक्ष में करवाया, रामसेतु को टूटने से बचाया, गंगा जी को राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिलाया और धरती पर अकेले 74 चातुर्मास व्रत पूर्ण किए। उन्होंने अनेक चिकित्सालय, गौसेवालय, वृद्धाश्रम और वेदविद्यालयों का निःशुल्क संचालन करवाया तथा लाखों लोगों को धर्म परिवर्तन से वापस सनातन धर्म में लौटाया। उनके योगदान की वजह से सनातन धर्म में अनेक मील के पत्थर स्थापित हुए।

इस वर्धन्ति दिवस को मुंबई ज्योतिष्पीठाधीश्वर, काशी, ज्योतिर्मठ, मध्यप्रदेश सहित देश और विदेश के करोड़ों संत और भक्त अत्यंत श्रद्धापूर्वक हर्षोल्लास के साथ मना रहे हैं। श्रीविद्यामठ में पूरे दिन भजन-कीर्तन और महाभण्डारा का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों भक्तों ने भोजन और प्रसाद ग्रहण किया।

महामहोत्सव में प्रमुख रूप से डॉ. गिरीश चन्द्र तिवारी, गौरीकेदारेश्वर मंदिर के मुख्य अर्चक नारायण शास्त्री, डॉ. गिरीश दत्त पाण्डेय, श्रीविद्या मठ के प्रबंधक दीपेंद्र सिंह, अनिल पाण्डेय, रमेश उपाध्याय, कीर्ति हजारी शुक्ला, अभय शंकर तिवारी, सतीश अग्रहरी, सावित्री पाण्डेय, लता पाण्डेय, किरण शाही, लीला तिवारी, रिंकी सिंह, सुनीता जायसवाल, हीरा सिंह राजपूत, घनश्याम पटेल, अमला यादव सहित जगदगुरुकुलम के वैदिक छात्र, सन्त और भक्त उपस्थित थे।

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