Report: Manmeen Walia, New Delhi
दिल्ली के द्वारका जिले में डाबरी इलाके में हुई चाकूबाजी और हत्या की घटनाओं के बाद द्वारका पुलिस ने जिस तेजी, हिम्मत और प्रोफेशनल तरीके से कार्रवाई की, वह सच में काबिले-तारीफ है। कुशल पाल सिंह, डीसीपी, द्वारका की अगुवाई में पुलिस ने “ज़ीरो टॉलरेंस अगेंस्ट क्राइम” की नीति को जमीन पर उतारते हुए महज कुछ घंटों में दोनों मुख्य आरोपियों को दो अलग-अलग एनकाउंटर में पकड़ लिया।
29 मार्च 2026 की रात डाबरी के मद्हु विहार इलाके में 15 मिनट के अंदर दो बड़ी घटनाएं हुईं। पहली घटना में गोविंद झा नाम के व्यक्ति को चाकू मारा गया, जिनकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई। दूसरी घटना में तीन लोगों—हनी, अनीश और रोहित—पर हमला किया गया, जो गंभीर रूप से घायल हो गए। इन घटनाओं के बाद पूरे इलाके में डर का माहौल था, लेकिन द्वारका पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।
पहला एनकाउंटर: रोहित कुमार उर्फ नोड्डी की गिरफ्तारी
पहला एनकाउंटर 30 मार्च को सेक्टर-17 द्वारका के पास हुआ, जहां स्पेशल स्टाफ की टीम, इंस्पेक्टर कमलेश कुमार के नेतृत्व में आरोपी रोहित कुमार उर्फ नोड्डी (उम्र 21 साल) को ट्रैक कर रही थी। जैसे ही पुलिस ने उसे घेरा और सरेंडर करने को कहा, उसने तुरंत पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी और लगातार 3 गोलियां चलाईं। एक गोली हेड कांस्टेबल जगत सिंह के बेहद करीब से निकली, जो बहुत खतरनाक स्थिति थी।
इसके बावजूद पुलिस टीम ने धैर्य और समझदारी दिखाते हुए नियंत्रित जवाबी फायरिंग की और 2 राउंड फायर किए। इस दौरान एक गोली आरोपी के पैर (घुटने) में लगी, जिससे वह गिर गया और पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसके पास से 7.65 एमएम पिस्टल, जिंदा कारतूस और फायर किए गए खोखे बरामद हुए। घायल आरोपी को तुरंत अस्पताल भेजा गया।
इस पूरे ऑपरेशन में स्पेशल स्टाफ की टीम—इंस्पेक्टर कमलेश कुमार, एसआई राकेश, एसआई दिनेश, एएसआई विजय, एएसआई रसमुद्दीन, एएसआई राजेंद्र, एचसी जगत सिंह, एचसी सुधीर और कॉन्स्टेबल परविंदर—ने बहादुरी और टीमवर्क का शानदार उदाहरण पेश किया। यह कार्रवाई उनकी ट्रेनिंग और हिम्मत को दिखाती है।

दूसरा एनकाउंटर: प्रेम शर्मा उर्फ हिमांशु की गिरफ्तारी
दूसरा एनकाउंटर उसी दिन रात करीब 10:30 बजे नजफगढ़ नाला रोड पर हुआ, जहां AATS टीम, इंस्पेक्टर मनीष यादव के नेतृत्व में, मुख्य आरोपी प्रेम शर्मा उर्फ हिमांशु (उम्र 21 साल) को पकड़ने पहुंची। आरोपी चोरी की स्कूटी पर था। पुलिस ने उसे रुकने और सरेंडर करने को कहा, लेकिन उसने भी पुलिस पर 3 राउंड फायरिंग कर दी।
इस दौरान एक गोली हेड कांस्टेबल संदीप की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी, जिससे उनकी जान बच गई। पुलिस टीम ने भी संयम रखते हुए 3 राउंड जवाबी फायरिंग की और आरोपी को पैर में गोली मारकर काबू कर लिया। उसके पास से भी पिस्टल, कारतूस और चोरी की स्कूटी बरामद हुई।
इस ऑपरेशन में AATS टीम—इंस्पेक्टर मनीष यादव, एसआई पवन, एएसआई देव, एचसी मनीष, एचसी संदीप, एचसी मनोज और एचसी हेमचंद—ने जबरदस्त बहादुरी और सूझबूझ दिखाई। उनकी तेजी और सटीक कार्रवाई ने मुख्य आरोपी को पकड़ने में बड़ी भूमिका निभाई।
इन दोनों एनकाउंटर में सबसे खास बात यह रही कि पुलिस ने बेहद संयम और प्रोफेशनल तरीके से काम किया। दोनों ही मामलों में पहले आरोपियों को सरेंडर करने का मौका दिया गया, लेकिन जब उन्होंने फायरिंग की, तभी पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाब दिया।
कुशल पाल सिंह, डीसीपी, द्वारका की लीडरशिप इस पूरी सफलता की सबसे बड़ी वजह रही। उन्होंने सही समय पर सही टीम लगाई और लगातार मॉनिटरिंग की, जिससे इतनी जल्दी दोनों आरोपी पकड़े जा सके। उनकी सख्त नीति और स्पष्ट संदेश—“अपराध बर्दाश्त नहीं होगा”—इस ऑपरेशन में साफ नजर आता है।
द्वारका पुलिस की स्पेशल स्टाफ और AATS टीम के हर सदस्य ने अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की। यह ऑपरेशन दिखाता है कि दिल्ली पुलिस पूरी तरह सतर्क, सक्षम और अपराध के खिलाफ सख्त है।
कुल मिलाकर, डाबरी केस में हुए ये दोनों एनकाउंटर द्वारका पुलिस की बहादुरी, तैयारी और मजबूत नेतृत्व का शानदार उदाहरण हैं। यह कार्रवाई अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून से बचना नामुमकिन है। वहीं आम जनता के लिए यह भरोसा भी है कि उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस हर समय तैयार है।



