AI Cyber Security Insight India: एआई से बदल रहा साइबर फ्रॉड का चेहरा, भारत में बढ़ते खतरे पर वैश्विक चेतावनी
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जहां एक तरफ तकनीकी प्रगति का प्रतीक बन रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह साइबर अपराधियों के लिए एक नया और खतरनाक हथियार भी बनता जा रहा है। भारत समेत पूरी दुनिया में एआई-सक्षम साइबर धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है और इसका पैटर्न पारंपरिक साइबर क्राइम से कहीं अधिक जटिल और खतरनाक होता जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर स्थिति भी गंभीर होती जा रही है। एफबीआई की इंटरनेट क्राइम रिपोर्ट 2025 के अनुसार, अमेरिका में 22,000 से अधिक एआई से जुड़ी साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें लगभग 893 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। यह पहली बार है जब एआई-आधारित धोखाधड़ी को अलग श्रेणी के रूप में औपचारिक रूप से दर्ज किया गया है, जो इस खतरे की गंभीरता को दर्शाता है।
भारत में भी स्थिति तेजी से बदल रही है। गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने 2025 में एआई-आधारित धोखाधड़ी के मामलों में तेज वृद्धि दर्ज की है। देशभर में हजारों लोग इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं और सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान सामने आया है। अब एआई-सक्षम साइबर फ्रॉड को राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग श्रेणी के रूप में निगरानी में रखा जा रहा है।
हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत में साइबर अपराध से कुल नुकसान लगभग 19,812 से 22,495 करोड़ रुपये के बीच पहुंच चुका है, जबकि 21 से 28 लाख तक शिकायतें दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि कई मामले रिपोर्ट ही नहीं होते।
एआई की मदद से साइबर अपराधी अब अधिक परिष्कृत तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें फिशिंग ईमेल, नकली वेबसाइटें, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर प्रतिरूपण, और सबसे खतरनाक वॉइस और वीडियो क्लोनिंग शामिल है। इसके जरिए अपराधी किसी परिवार के सदस्य, बैंक अधिकारी या सरकारी प्रतिनिधि की आवाज और चेहरा तक कॉपी कर लेते हैं, जिससे धोखाधड़ी की पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा निवेश धोखाधड़ी के मामलों में भी भारी वृद्धि देखी गई है। नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और डीपफेक आधारित प्रमोशन के जरिए लोगों को बड़ी रकम निवेश करने के लिए फंसाया जा रहा है। पिछले छह महीनों में ही प्रमुख शहरों में हजारों लोग इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं, जिनमें भारी वित्तीय नुकसान दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई खुद नए प्रकार के अपराध नहीं बना रहा है, बल्कि पहले से मौजूद साइबर अपराधों को अधिक प्रभावी, तेज और विश्वसनीय बना रहा है। इससे अपराधियों को बड़े पैमाने पर लोगों को निशाना बनाने की क्षमता मिल रही है।
बैंकों, फिनटेक कंपनियों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह स्थिति एक गंभीर चेतावनी है। अब आवश्यकता है कि पहचान प्रणाली, सत्यापन तकनीक और साइबर जागरूकता अभियानों को और मजबूत किया जाए, ताकि इस बढ़ते खतरे से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।



