Sunday, May 31, 2026

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Paramedical Staff Regularization: दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के नियमितीकरण का रास्ता खोला

Paramedical Staff Regularization: दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के नियमितीकरण का रास्ता खोला

रिपोर्ट: हेमंत कुमार

नई दिल्ली — दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में पिछले 15–20 वर्षों से सेवाएं दे रहे नर्सिंग और पैरामेडिकल कर्मचारियों के लिए 10 नवंबर 2025 का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस दिन अपने फैसले में कहा कि इन कर्मचारियों की सेवाएं “निरंतर, आवश्यक और नियमित प्रकृति की” रही हैं और इसलिए उनका नियमितीकरण केवल दया नहीं, बल्कि उनका वैधानिक अधिकार है। यह फैसला 23 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा, संघर्ष और पीड़ा का अंत लेकर आया।

कर्मचारियों ने बताया कि सन् 2002 से वे अपने अधिकारों के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। कई बार उम्मीद की किरण दिखाई देती, तो कभी प्रशासनिक निराशा उन्हें घेर लेती थी। कर्मचारियों के अनुसार यह फैसला उन सभी रातों की जीत है, जब वे ड्यूटी पर थे और घर पर परिवार उनका इंतजार करता रहा, उन त्योहारों की जीत है जो अस्पताल की गलियों में गुज़रे और उन महीनों की जीत है जब महामारी के दौरान बच्चों को गले नहीं लगा सके।

एडवोकेट मोनिका अरोड़ा ने इस लंबी और जटिल कानूनी लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। कर्मचारियों ने कहा कि वह हर सुनवाई में उनकी पीड़ा और भावनाओं को अदालत के सामने दमदार आवाज़ के रूप में पेश करती रहीं। अशोक कुमार ने कहा, “पिछले 20 साल से अस्पताल ही हमारा दूसरा घर है, यह फैसला हमारे लिए सम्मान की वापसी है।” पंकज शुक्ला ने बताया कि इस फैसले ने उनके बच्चों की आंखों में उम्मीद लौटा दी। रुचि नारायण ने कहा कि महामारी के दौरान उन्होंने कई बार अपनी जान जोखिम में डाली, लेकिन अब उनके संघर्ष को न्याय मिला। मोहम्मद आसिम ने कहा कि यह फैसला उनके परिवारों में नौकरी और भविष्य को लेकर पैदा हुए डर को खत्म करता है।

अन्य कर्मचारियों का संयुक्त बयान, जिसमें नितिन आत्रे, रुचि कौशिक, चंद्रमोहन आर्या, दिवाकर सिंह, अब्दुर रहमान, कृष्ण कुमार, नर्सिंग ऑफिसर मेघा मसीह, सी बी रात्रा, अनु बाला कुमारी और अन्य शामिल थे, में कहा गया कि वे 2002 से संघर्षरत हैं और अदालत के आदेश को बिना देरी लागू करने की सरकार से अपील की। कर्मचारियों ने नियमितीकरण की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की।

यह ऐतिहासिक फैसला न केवल कर्मचारियों के अधिकारों की जीत है बल्कि उन सभी कर्मचारियों की मेहनत, त्याग और संघर्ष का सम्मान भी है, जिन्होंने वर्षों तक सेवा के दौरान अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया।

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