नई दिल्ली : देश में जब राम मंदिर (Ram Mandir Ayodhya) का मामला कोर्ट (Supreme Court) के माधयम से सुलझ गया है और बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के स्थान पर भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है, इसके बाद मुस्लिमों के कई ऐसे धर्मस्थल हैं, जिसके मंदिर होने के दावे किए जा रहे हैं। ताजा मामला राजस्थान के अजमेर शरीफ (Ajmer Sharif Rajasthan) का है, जहाँ दरगाह के नीचे शिवलिंग (Shiv Mandir) होने का दावा कर दिया गया है। हिंदू सेना (Hindu Sena) के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता (Vishnu Gupta) ने राजस्थान के अजमेर जिला कोर्ट में एक दीवानी मुकदमा दायर किया है, जिसमें दावा किया गया है कि अजमेर दरगाह (Ajmer Sharif Dargah) एक शिव मंदिर के अवशेषों पर बनाई गई थी।
इस मुकदमे में गुप्ता ने दावा किया है कि दरगाह पुराने हिंदू मंदिरों (Ancient Hindu Temple) के स्थलों पर बनाई गई प्रतीत होती है, और इसके नीचे एक शिव लिंग स्थित है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि मुसलमानों ने मंदिर परिसर में अनधिकृत रूप से अतिक्रमण किया और एक ऊपरी संरचना बनाई जिसे वे ख्वाजा दरगाह साहिब कहते हैं। इस मामले में राजस्थान के अजमेर जिला कोर्ट (District Court Ajmer) ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और अजमेर दरगाह समिति को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को तय की गई है।
विष्णु गुप्ता की ओर से कोर्ट में पेश याचिका में उन्होंने 168 पेज की ‘अजमेर: हिस्टॉरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव‘ किताब के पेज नं. 93, 94, 96 और 97 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जब मैंने हरबिलास शारदा की किताब को पढ़ा, तो उसमें साफ-साफ लिखा था कि यहां पहले ब्राह्मण दंपती रहते थे। यह दंपती सुबह चंदन से महादेव का तिलक करते थे और जलाभिषेक करते थे।
याचिकाकर्ता के वकील रामस्वरूप बिश्नोई ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश हरविलास शारदा (Retired Judge Har Bilas Sarda) की पुस्तक का हवाला दिया, जिसमें बताया गया है कि दरगाह के निर्माण में हिंदू मंदिर के मलबे का इस्तेमाल किया गया था। पुस्तक में दरगाह के भीतर एक तहखाने का विवरण दिया गया है, जिसमें कथित तौर पर एक शिव लिंग होने का दावा है। पुस्तक में दरगाह की संरचना में जैन मंदिर के अवशेषों का भी उल्लेख किया गया है और इसके 75 फीट ऊंचे बुलंद दरवाजे के निर्माण में मंदिर के मलबे के तत्वों का भी इसमें वर्णन है। अजमेर के बारे में रोचक तथ्य यह भी है कि यहां पृथ्वीराज चौहान (prithviraj chauhan) ने भी शासन किया था। जज हरविलास ने बताया कि अजमेर महायोद्धा पृथ्वीराज चौहान के वंशजो ने ही मंदिर का निर्माण कराया था।
अजमेर दरगाह विवाद मामले में 27 नवम्बर को याचिका मंजूर कर ली गई। इसको लेकर 20 दिसम्बर को अब मामले की अगली सुनवाई होगी। इधर, अगली सुनवाई को लेकर सियासत हो या आम, हर जगह हलचल मच गई है कि आखिर अब क्या होगा? वहीं अगली सुनवाई पर कोर्ट के आदेश पर अजमेर दरगाह समिति, अल्पसंख्यक मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। इधर, सियासत में भी बयानबाजी का दौर जारी है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा समेत कई नेताओं ने भी इस याचिका विरोध किया।


