Cyber Awareness Campaign: भारत का डिजिटल रणक्षेत्र और साइबर युद्ध का 100वां विचार, सतर्कता ही सुरक्षा है
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
27 जुलाई 2025 को जारी “आज का साइबर सुरक्षा विचार” अपने 100वें संस्करण में प्रवेश कर चुका है — और यह इस बात की गवाही है कि भारत में डिजिटल सुरक्षा एक गंभीर राष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुकी है। साइबर अपराधों का स्वरूप अब केवल तकनीकी धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह हमारी सामाजिक संरचना, विदेश नीति, और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्रभावित कर रहा है। 2024 में देश ने ₹22,845 करोड़ की चौंकाने वाली राशि साइबर धोखाधड़ी में गंवाई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 206% अधिक है। यह आंकड़ा भारत में साइबर खतरों की गंभीरता और इनके पीछे की जटिल अंतरराष्ट्रीय साजिशों को उजागर करता है।
दक्षिण-पूर्व एशिया, विशेषकर कंबोडिया, म्यांमार और लाओस में बने स्कैम हब अब भारतीयों को लक्षित कर रहे हैं। इन हब्स में क्रिप्टो प्लेटफॉर्म का लालच, रोमांटिक जालसाज़ी और पुलिस बनकर डराने जैसे हथकंडों के ज़रिए लोगों को ठगा जा रहा है। चिंता की बात यह भी है कि इन गिरोहों में शामिल कई लोग भारतीय नागरिक हैं, जो अवैध तरीके से विदेश पहुंचे और वहां इस अपराध उद्योग का हिस्सा बन गए। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी भारतीय नागरिक विदेशों में साइबर अपराधों में लिप्त पाए जाएंगे, उन पर भारत में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कंबोडिया में गृह मंत्रालय की निर्णायक कार्रवाई
बीते 15 दिनों में कंबोडिया में 138 स्थानों पर छापेमारी कर 3,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 105 भारतीय और 606 महिलाएं शामिल थीं। इन छापों में निम्नलिखित वस्तुएं बरामद हुईं:
- नकली भारतीय और चीनी पुलिस की वर्दियाँ
- ड्रग्स बनाने की मशीनें और प्रतिबंधित दवाएं
- लैपटॉप, मोबाइल, हथियार और धोखाधड़ी में प्रयुक्त साइबर सामग्री
भारत सरकार इन गिरोहों के चंगुल में फंसे भारतीयों को वापस लाने की प्रक्रिया में तेजी से काम कर रही है।
आज के प्रमुख साइबर खतरे
- फंड फ्लिपिंग: छोटे लेन-देन के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग
- पिग बुचरिंग स्कैम: भावनात्मक धोखे से लंबी अवधि में निवेश ठगना
- डिजिटल अरेस्ट स्कैम: नकली पुलिस बनकर डराकर पैसे वसूलना
जागरूकता अभियानों की सीमाएं
हालांकि सरकार और साइबर एजेंसियों द्वारा कई जागरूकता अभियान चलाए गए हैं, परंतु इनकी प्रभावशीलता सीमित रही है। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:
- भारत में अब भी बहुत कम डिजिटल साक्षरता
- अंतरराष्ट्रीय मामलों में कानूनी प्रक्रिया की धीमी गति
- शर्म या भयवश पीड़ितों द्वारा मामले दर्ज न कराना
रणनीतिक समाधान और आगे की राह
- FATF ट्रैवल रूल का कड़ाई से पालन
- हाई-रिस्क क्रिप्टो एक्सचेंजों को तत्काल ब्लैकलिस्ट करना
- AI आधारित टूल्स जैसे Chainalysis और TRM Labs का उपयोग करके स्कैम पैटर्न की पहचान
- बहुभाषीय क्रिप्टो फॉरेंसिक टीमों का गठन
- द्विभाषीय जागरूकता अभियान और तेज़ साइबर समाधान प्रणाली का विकास
सामान्य नागरिकों के लिए आत्म-सुरक्षा के उपाय
- केवल परिचित और प्रमाणित स्रोतों से ही निवेश करें
- किसी भी लिंक, ऐप, या कॉलर की पूरी जांच करें
- मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और हार्डवेयर वॉलेट का उपयोग करें
- संदेहास्पद गतिविधियों की रिपोर्ट चक्षु पोर्टल पर अवश्य करें
100वां संस्करण विशेष संदेश
भारत अब एक डिजिटल महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, परंतु यह केवल तकनीक नहीं, नागरिकों की सामूहिक जागरूकता और भागीदारी से ही संभव है। साइबर अपराध अब तकनीकी चुनौती नहीं, एक सामाजिक संकट बन चुका है। इसे हराने के लिए सरकार, तकनीकी संस्थान, मीडिया और हर नागरिक को मिलकर प्रयास करना होगा। डिजिटल सुरक्षा अब केवल एक विकल्प नहीं — यह हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।


