Mukherjee Nagar Murder Case: 26 साल बाद सुलझा मर्डर-लूट कांड, बिहार से मुख्य आरोपी गिरफ्तार
रिपोर्ट: हेमंत कुमार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुखर्जी नगर थाना क्षेत्र के 26 साल पुराने सनसनीखेज मर्डर कम रॉबरी केस को सुलझा लिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी, जो पिछले 26 वर्षों से कानून से बचता फिर रहा था, उसे बिहार के समस्तीपुर जिले से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी की पहचान नरेश मुखिया उर्फ नागेश्वर मुखिया के रूप में हुई है, जिसे वर्ष 2000 में ही अदालत द्वारा घोषित अपराधी (PO) करार दिया गया था।
यह मामला 13 जनवरी 2000 को FIR नंबर 15/2000 के तहत धारा 302 और 392 IPC में दर्ज किया गया था। उस समय आरोपी नरेश मुखिया दिल्ली के इंद्र विहार इलाके में एक मकान में काम करता था। उसी इमारत के पहले तल पर रहने वाली आशा छाबड़ा ने हाल ही में एक मकान बेचकर अपने घर में बड़ी रकम नकद रखी थी। इस जानकारी के आधार पर आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर लूट की साजिश रची।
घटना के दिन आरोपी और उसके साथी घर का दरवाजा खुला पाकर अंदर घुस गए और अलमारी से नकदी निकालने लगे। तभी आशा छाबड़ा ने उन्हें देख लिया और शोर मचाने लगीं। इसके बाद आरोपियों ने मिलकर एमटीएनएल फोन के तार से उनका गला घोंट दिया और करीब 8 लाख रुपये नकद व अन्य कीमती सामान लूटकर मौके से फरार हो गए। इस वारदात ने उस समय पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी, लेकिन आरोपी फरार हो गया और पुलिस की पकड़ से दूर रहा।

क्राइम ब्रांच की टीम, इंस्पेक्टर पुखराज सिंह के नेतृत्व में, लंबे समय से पुराने और अनसुलझे मामलों पर काम कर रही थी। इसी दौरान इस केस को फिर से खोला गया और आरोपी की तलाश तेज की गई। ASI प्रदीप और HC नरेंद्र को मिली अहम जानकारी के आधार पर पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और फील्ड वर्क के जरिए आरोपी की लोकेशन ट्रेस की।
02 मई 2026 को एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें SI निरंजन, ASI प्रदीप, ASI पवन, HC सचिन, HC मुकेश, HC नरेंद्र, HC विक्रांत और कॉन्स्टेबल मनोज शामिल थे। यह टीम ACP अशोक शर्मा के सुपरविजन में बिहार के समस्तीपुर जिले के सिंघिया थाना क्षेत्र के गांव मामूरपुर पहुंची और एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कई राज्यों में अपने ठिकाने बदले। हत्या के बाद वह पहले सिलीगुड़ी भाग गया, फिर कोलकाता में कई साल रहा और बाद में अहमदाबाद में लगभग 17-18 साल तक मजदूरी करता रहा। हाल के वर्षों में वह पटना में काम कर रहा था और पिछले 1-2 साल से अपने गांव में एक छोटी किराना दुकान चला रहा था।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, आरोपी की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। उसके परिवार में पत्नी, मां और एक बेटा है। पुलिस अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है और आरोपी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। यह केस दिल्ली पुलिस की लगातार कोशिशों और तकनीकी जांच का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें 26 साल बाद न्याय की दिशा में अहम कदम उठाया गया है।



